अंतर्दृष्टि के लिए Varanasi (Kashi), India

आज का पंचांग

रविवार, 20 सितंबर 2026. ब्रह्मांड परिवर्तन और स्पष्टता का संदेश दे रहा है। इष्टतम सामंजस्य के लिए अपने कार्यों को चंद्र लय के साथ संरेखित करें।

आज का पंचांग

लाइव
दिनांकरविवार, 20 सितंबर 2026
शक संवत1948
विक्रम संवत2083
मासभाद्रपद
पक्षशुक्ल पक्ष
दिशाशूलपश्चिम
तिथिनवमी तक 05:50 PM फिर दशमी
नक्षत्रपूर्व आषाढ़ा तक 04:31 AM फिर उत्तर आषाढ़ा
योगसौभाग्य तक 03:20 PM
करणकौलव तक 05:50 PM
अभिजित मुहूर्त11:27 AM – 12:16 PM
राहु काल04:26 PM – 05:57 PM
यमगण्ड10:20 AM – 11:51 AM
आज का व्रतरविवार व्रत

आज का राहु काल

04:26 PM05:57 PM

इस अवधि के दौरान नए वित्तीय उपक्रम शुरू करने या प्रमुख अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने से बचें।

आज का पंचांग

तिथि
नवमी
नक्षत्र
पूर्व आषाढ़ा
योग
सौभाग्य
करण
कौलव
अभिजित मुहूर्त
11:27 AM
12:16 PM

नए आरंभ के लिए सबसे शुभ समय

शुभ काल

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:57
प्रातः संध्या
05:21 – 06:09
विजय मुहूर्त
15:31 – 16:19
गोधूलि मुहूर्त
17:45 – 18:09
सायाह्न संध्या
17:33 – 18:21
निशीथ मुहूर्त
23:27 – 00:15

दिन विवरण

सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
17:57
चंद्रोदय
13:42
चंद्रास्त
मध्याह्न
11:51
दिनमान
12h 12m
रात्रिमान
11h 48m
दृक ऋतु
वर्षा
वैदिक ऋतु
वर्षा
दृक अयन
दक्षिणायन
नक्षत्र पाद
1
सूर्य नक्षत्र
उत्तर फाल्गुनी · पाद 2

वास और स्थिति

आनंदादि योग
अमृत
चंद्र वास
पूर्व
राहु वास
दक्षिण
अग्नि वास
पाताल
शिव वास
वृषभ
होमाहुति
शुक्र
गंड मूल
निष्क्रिय
भद्रा (विष्टि)
निष्क्रिय

चौघड़िया

8 दिन + 8 रात्रि · हरा = शुभ

दिन
  • उद्वेग05:4507:17
  • चर07:1708:48
  • लाभ08:4810:20
  • अमृत10:2011:51
  • काल11:5113:23
  • शुभ13:2314:54
  • रोग14:5416:26
  • उद्वेग16:2617:57
रात्रि
  • शुभ17:5719:26
  • रोग19:2620:54
  • उद्वेग20:5422:23
  • चर22:2323:51
  • लाभ23:5101:20
  • अमृत01:2002:48
  • काल02:4804:17
  • शुभ04:1705:45

होरा

24 ग्रह घंटे · प्रत्येक का एक ग्रह स्वामी

सूर्य05:4506:46
शुक्र06:4607:47
बुध07:4708:48
चंद्र08:4809:49
शनि09:4910:50
गुरु10:5011:51
मंगल11:5112:52
सूर्य12:5213:53
शुक्र13:5314:54
बुध14:5415:55
चंद्र15:5516:56
शनि16:5617:57
गुरु17:5718:56
मंगल18:5619:55
सूर्य19:5520:54
शुक्र20:5421:53
बुध21:5322:52
चंद्र22:5223:51
शनि23:5100:50
गुरु00:5001:49
मंगल01:4902:48
सूर्य02:4803:47
शुक्र03:4704:46
बुध04:4605:45

चंद्रबलम

आज जिन जन्म राशियों के लिए चंद्रबल अनुकूल है

मिथुनकर्कतुलाधनुकुंभमीन

ताराबलम

आज जिन जन्म नक्षत्रों के लिए तारा अनुकूल है

अश्विनीकृत्तिकारोहिणीआर्द्रापुष्यमघाउत्तर फाल्गुनीहस्तस्वातीअनुराधामूलउत्तर आषाढ़ाश्रवणशतभिषाउत्तर भाद्रपदा

राशिफल दृष्टिकोण

21 मार्च – 19 अप्रैल

मेष

आज मंगल का प्रभाव आपकी व्यावसायिक महत्वाकांक्षाओं को बल देता है। सहयोगी परियोजनाओं में साहसिक कदम उठाएं।

· भाग्यांक: 7· शक्ति: उच्च
20 अप्रैल – 20 मई

वृषभ

शुक्र भावनात्मक स्थिरता और आर्थिक विकास का समय लाता है। दीर्घकालिक योजना बनाने का उत्तम दिन।

· भाग्यांक: 2· शक्ति: मध्य
21 मई – 20 जून

मिथुन

बुध संचार को प्रभावित करता है। किसी रुकी हुई स्थिति में आज सफलता मिल सकती है।

· भाग्यांक: 5· शक्ति: उच्च
21 जून – 22 जुलाई

कर्क

आज आपकी सहजज्ञान सबसे बड़ी शक्ति है। व्यक्तिगत रिश्तों में तर्क से ज्यादा भावना पर भरोसा करें।

· भाग्यांक: 9· शक्ति: मध्य

पंचांग क्या है?

पंचांग का अर्थ है "पाँच अंग" — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों मिलकर किसी दिन का वैदिक विवरण बनाते हैं, अर्थात् उस दिन सूर्य और चंद्रमा वास्तव में कहाँ स्थित हैं। पारंपरिक मुहूर्त-निर्णय इन्हीं पर आधारित होते हैं।

ग्रेगोरियन कैलेंडर निश्चित 24 घंटे का दिन गिनता है, जबकि पंचांग आकाश का अनुसरण करता है। एक तिथि 19 घंटे की भी हो सकती है और 26 घंटे की भी। नक्षत्र दोपहर में बदल सकता है। यही कारण है कि दो लोग "आज की तिथि" पर असहमत होकर भी दोनों सही हो सकते हैं — वे अलग अंग देख रहे हैं, या अलग शहर का पंचांग।

पाँच अंग और उनका अर्थ

तिथि चंद्र दिवस है — चंद्रमा को सूर्य से 12° आगे बढ़ने में लगा समय। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, शुक्ल और कृष्ण पक्ष में 15-15। व्रत और पर्व तिथि से निर्धारित होते हैं, तारीख से नहीं — इसीलिए दीपावली हर वर्ष अलग तारीख पर पड़ती है।

वार सप्ताह का दिन है, जिसका स्वामी एक ग्रह होता है — रविवार का सूर्य, सोमवार का चंद्र। वार से ही उस दिन का राहु काल और होरा क्रम तय होता है।

नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति बताता है — 27 नक्षत्रों में से चंद्रमा किसमें है। नामकरण, मुहूर्त चयन और दिन के स्वभाव के निर्णय में यही अंग सर्वाधिक प्रयुक्त होता है।

योग सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त अंशों से बनता है — कुल 27, जिनमें व्यतीपात और वैधृति जैसे कुछ योग नए आरंभ के लिए वर्जित माने जाते हैं।

करण आधी तिथि है। मास में ग्यारह करण चक्र में आते हैं और छोटे, व्यावहारिक कार्यों के लिए देखे जाते हैं।

आपका शहर पंचांग क्यों बदल देता है

हर अंग सूर्योदय से बँधा है। भारत में पूर्व से पश्चिम तक सूर्योदय में एक घंटे से अधिक का अंतर होता है, इसलिए गुवाहाटी के सूर्योदय पर चल रही तिथि मुंबई के सूर्योदय पर वही हो, यह आवश्यक नहीं — और तब दोनों नगर एक ही व्रत भिन्न दिन कर सकते हैं, दोनों शास्त्रसम्मत।

दो पंचांगों की तुलना करते समय भ्रम का सबसे बड़ा कारण यही है। सामान्य संदर्भ के लिए काशी (वाराणसी) लिया जाता है, किंतु जो आप वास्तव में निर्धारित कर रहे हैं — व्रत, मुहूर्त, पूजा — उसके लिए अपने शहर का पंचांग देखें।

आज का पंचांग कैसे पढ़ें

सबसे पहले तिथि और उसका समाप्ति समय देखें — इससे पता चलता है कि आप किस चंद्र दिवस में हैं और वह कब बदलेगा। फिर नक्षत्र देखें, क्योंकि अधिकांश मुहूर्त नियम नक्षत्र पर आधारित हैं। इसके बाद अशुभ काल देखें — राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल — इन अवधियों में नया कार्य आरंभ नहीं किया जाता।

यदि आप केवल दिन पढ़ नहीं रहे बल्कि समय चुन रहे हैं, तो चौघड़िया और होरा देखें, तथा मध्याह्न के आसपास पड़ने वाला अभिजित मुहूर्त — जो बुधवार को छोड़कर प्रायः सभी दिन शुभ माना जाता है।

पंचांग — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय कैलेंडर के अनुसार आज कौन सी तिथि है?

20 सितंबर 2026 को सूर्योदय के समय नवमी तिथि है, जो 05:50 PM तक रहती है, उसके बाद दशमी आरंभ होती है। नक्षत्र पूर्व आषाढ़ा है। तिथि सूर्योदय से पढ़ी जाती है, इसलिए यह गणना Varanasi (Kashi), India के सूर्योदय पर आधारित है।

आज के दिन शुभ मुहूर्त कौन सा है?

अभिजित मुहूर्त 11:27 AM से 12:16 PM तक है — सूर्य के मध्याह्न के आसपास का यह समय बुधवार को छोड़कर सामान्यतः शुभ माना जाता है। इसके विपरीत राहु काल 04:26 PM से 05:57 PM तक रहता है, जिसमें कोई नया कार्य आरंभ करने से परंपरागत रूप से बचा जाता है।

पंचांग क्या है?

पंचांग किसी दिन का वैदिक पंचांग-विवरण है, जो पाँच अंगों से बनता है — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। यह बताता है कि उस दिन सूर्य और चंद्रमा वास्तव में कहाँ हैं, और पारंपरिक मुहूर्त-निर्णय इसी पर आधारित होते हैं।

अलग-अलग वेबसाइट पर पंचांग भिन्न क्यों दिखता है?

प्रायः स्थान और सूर्योदय के संदर्भ के कारण। हर अंग सूर्योदय से बँधा है और भारत में सूर्योदय का अंतर एक घंटे से अधिक है, इसलिए सूर्योदय की तिथि नगर-भेद से बदल सकती है। दूसरा कारण अयनांश का भेद होता है।

पंचांग के पाँच अंग कौन से हैं?

तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। तिथि चंद्र दिवस है, वार ग्रह-स्वामित्व वाला दिन, नक्षत्र चंद्रमा का तारा-खंड, योग सूर्य-चंद्र का संयोग, और करण आधी तिथि।

दिन के कौन से समय टालने चाहिए?

राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल — तीनों अशुभ अवधियाँ हैं, प्रत्येक दिन का आठवाँ भाग, और वार से निश्चित। यात्रा, क्रय, हस्ताक्षर, संस्कार जैसे नए आरंभ इनमें नहीं किए जाते। पहले से चल रहे कार्यों पर निषेध नहीं है।

क्या तिथि पूरे दिन एक ही रहती है?

नहीं। तिथि लगभग 19 से 26 घंटे तक चलती है, इसलिए वह प्रायः दिन के बीच समाप्त होती है। पंचांग की परंपरा है कि सूर्योदय के समय चल रही तिथि ही उस दिन की तिथि मानी जाती है।