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अक्षय तृतीया 1943

अक्षय फल देने वाली तृतीया — शुभारंभ और स्वर्ण खरीद का अबूझ मुहूर्त।

इस वर्ष की तिथि देखें — अक्षय तृतीया 2026 कब है
अक्षय तृतीया 1943 date
शुक्रवार, 7 मई 1943
Tithi: वैशाख शुक्ल तृतीया
Tithi window: 03:53 PM, गुरुवार, 6 मई 1943 → 05:06 PM, शुक्रवार, 7 मई 1943

मुहूर्त और समय

काशी/IST · खगोलीय गणना
  • संकल्प (सूर्योदय)05:17
  • मध्याह्न पूजा मुहूर्त10:35 – 13:14
  • व्रत अवधि (तिथि)1943-05-06 · 15:53 → 17:06
  • पारण (तिथि समाप्ति)17:06

Festival days follow the classical attribution rules — udaya (sunrise), pradosha (evening), nishita (midnight), madhyahna or aparahna vyapini as each festival prescribes — computed for Kashi/Varanasi (IST). Regional observance can differ by a day in some years.

अक्षय तृतीया की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ें

अक्षय तृतीया — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्षय तृतीया कब मनाई जाती है?

वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को, ग्रीष्म ऋतु में — शुक्ल पक्ष का तीसरा दिन। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।

अक्षय तृतीया इतनी शुभ क्यों मानी जाती है?

अक्षय का अर्थ है 'जो क्षीण न हो'। यह दिन अबूझ मुहूर्त है, इतना मंगलमय माना जाता है कि इस पर आरंभ, दान या अर्जित की गई वस्तु स्थिर रहकर बढ़ती है। अनेक महान आरंभ — त्रेता युग, गंगावतरण, महाभारत का लेखन — इसी पर रखे गए हैं।

क्या अक्षय तृतीया पर स्वर्ण खरीदना आवश्यक है?

नहीं। दिन का पारंपरिक मर्म दान और विष्णु तथा लक्ष्मी की उपासना है। स्वर्ण खरीदना एक बाद की, प्रचलित प्रथा है जो इस विचार से आई कि आज अर्जित वस्तु क्षीण नहीं होगी, किंतु यह अनिवार्य नहीं।

अक्षय तृतीया पर कौन-सा दान श्रेष्ठ है?

निर्धनों को देना दिन का सर्वप्रमुख कर्म है। चूँकि यह ग्रीष्म में पड़ता है, जल से भरे पात्र, शीतल पदार्थ, पंखा या पादुका का दान, अन्न, तिल और वस्त्र सहित, विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

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