Festival Calendar

गुरु पूर्णिमा 2046

आषाढ़ की पूर्णिमा को गुरु वंदन — व्यास पूर्णिमा।

गुरु पूर्णिमा 2046 date
बुधवार, 18 जुलाई 2046
Tithi: आषाढ़ पूर्णिमा
Tithi window: 05:59 AM, मंगलवार, 17 जुलाई 2046 → 06:25 AM, बुधवार, 18 जुलाई 2046
गुरु पूर्णिमा 2046
आरंभ में
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आज का पंचांग

काशी संदर्भ · तुरंत गणना
तिथि
अष्टमी
तक 18:59
नक्षत्र
भरणी
तक 20:18
योग
गण्ड
करण
बालव
सूर्योदय
05:27
सूर्यास्त
18:40
चंद्र राशि
मेष
सूर्य राशि
कर्क

मुहूर्त और समय

काशी/IST · खगोलीय गणना
  • संकल्प (सूर्योदय)05:17
  • सूर्यास्त18:50
  • व्रत अवधि (तिथि)2046-07-17 · 05:59 → 06:25
  • पारण (तिथि समाप्ति)06:25

Festival days follow the classical attribution rules — udaya (sunrise), pradosha (evening), nishita (midnight), madhyahna or aparahna vyapini as each festival prescribes — computed for Kashi/Varanasi (IST). Regional observance can differ by a day in some years.

गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ें

गुरु पूर्णिमा — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरु पूर्णिमा कब मनाई जाती है?

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को, वर्षा ऋतु के आरंभ में — शुक्ल पक्ष का पंद्रहवाँ दिन। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।

गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

यह वेद व्यास का जन्मदिन मनाया जाता है, जिन्होंने वेद को चार में विभाजित किया, महाभारत और पुराणों की रचना की, और परंपरा के आदर्श गुरु रूप में सम्मानित हैं। आज गुरु का सम्मान उस समस्त शिक्षण-परंपरा का सम्मान है जो उन तक पहुँचती है।

गुरु पूर्णिमा कैसे मनाई जाती है?

शिष्य अपने गुरु का सम्मान करते हैं — पुष्प, दक्षिणा और आदर अर्पित कर, चरण स्पर्श कर — अथवा जहाँ गुरु अनुपस्थित हों वहाँ गुरु पादुका या प्रतिमा की पूजा करते हैं। व्यास और परंपरा की पूजा होती है, और अध्ययन या साधना का संकल्प लिया जाता है।

गुरु शब्द का अर्थ क्या है?

पारंपरिक व्युत्पत्ति से 'गु' का अर्थ अंधकार और 'रु' उसका निवारण करने वाला — गुरु वह है जो अज्ञान का अंधकार दूर करता है। गुरु पूर्णिमा उन सबको स्वीकार करने का दिन है जिनसे सच्चा ज्ञान प्राप्त हुआ।

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