Festival Calendar

होली 1964

रंगों का पर्व (धुलंडी) — होलिका दहन के अगले दिन, चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को।

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होली 1964 date
रविवार, 29 मार्च 1964
Tithi: चैत्र कृष्ण प्रतिपदा
Tithi window: 08:16 AM, शनिवार, 28 मार्च 1964 → 09:04 AM, रविवार, 29 मार्च 1964

मुहूर्त और समय

काशी/IST · खगोलीय गणना
  • संकल्प (सूर्योदय)05:51
  • सूर्यास्त18:13
  • व्रत अवधि (तिथि)1964-03-28 · 08:16 → 09:04
  • पारण (तिथि समाप्ति)09:04

Festival days follow the classical attribution rules — udaya (sunrise), pradosha (evening), nishita (midnight), madhyahna or aparahna vyapini as each festival prescribes — computed for Kashi/Varanasi (IST). Regional observance can differ by a day in some years.

होली की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ें

होली — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होलिका दहन में भद्रा से क्यों बचा जाता है?

भद्रा (विष्टि करण) शुभ अग्नि-कर्मों को दूषित करने वाली मानी जाती है। दहन प्रदोष काल में तभी होता है जब भद्रा बीत चुकी हो; यदि भद्रा सम्पूर्ण संध्या घेरे, तो दहन रात्रि में किया जाता है।

होली एक दिन की है या दो?

दो दिन। होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की संध्या को; रंगवाली होली अगले प्रातः, चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को।

होलिका की भस्म का क्या किया जाता है?

अगले प्रातः रंग आरंभ होने से पूर्व वह मस्तक पर लगाई जाती है, इस भाव से कि जो बीत गया वह अग्नि को समर्पित हो चुका।

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