नाग पंचमी 2034
श्रावण शुक्ल पंचमी को नाग देवता की पूजा।
आज का पंचांग
काशी संदर्भ · तुरंत गणना- तिथि
- अष्टमी
- तक 18:59
- नक्षत्र
- भरणी
- तक 20:18
- योग
- गण्ड
- करण
- बालव
- सूर्योदय
- 05:27
- सूर्यास्त
- 18:40
- चंद्र राशि
- मेष
- सूर्य राशि
- कर्क
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)05:33
- सूर्यास्त18:30
- व्रत अवधि (तिथि)2034-08-18 · 10:42 → 12:32
- पारण (तिथि समाप्ति)12:32
Festival days follow the classical attribution rules — udaya (sunrise), pradosha (evening), nishita (midnight), madhyahna or aparahna vyapini as each festival prescribes — computed for Kashi/Varanasi (IST). Regional observance can differ by a day in some years.
नाग पंचमी की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंनाग पंचमी — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नाग पंचमी कब मनाई जाती है?
नाग पंचमी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को, वर्षा ऋतु में — प्रायः जुलाई के अंत या अगस्त में — आती है। चंद्र पंचांग के अनुसार तिथि प्रतिवर्ष बदलती है; इस वर्ष की तिथि ऊपर देखें।
नाग पंचमी पर साँपों को दूध क्यों अर्पित किया जाता है?
दूध नाग देवता को नैवेद्य रूप में अर्पित किया जाता है — फसल, जल और उर्वरता के रक्षक साँप के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव। ध्यान रहे कि साँप दूध नहीं पचा पाते, अतः आज भक्त और जीव-कल्याण परंपरा जीवित साँप के बजाय नाग प्रतिमा, चित्र या बाँबी पर दूध अर्पित करते हैं।
नाग पंचमी पर क्या नहीं करना चाहिए?
अनेक परिवार इस दिन भूमि खोदना या हल चलाना (बिल में साँपों की रक्षा हेतु), तप्त लोहे के तवे पर तलना, तथा काटना-सिलना नहीं करते — ये सब नाग के प्रति अहिंसा के रूप में पालन किए जाते हैं।
नाग पंचमी पर किन नागों की पूजा होती है?
नौ प्रमुख नागों का आवाहन होता है: अनन्त (शेष), वासुकि, पद्मनाभ, कम्बल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिय आदि। शास्त्रों में शेष, वासुकि और तक्षक सर्वाधिक प्रमुख हैं।
Other major festivals in 2034
- मकर संक्रांति — 14 जनवरी 2034
- वसंत पंचमी — 25 जनवरी 2034
- महाशिवरात्रि — 17 फ़रवरी 2034
- होलिका दहन — 4 मार्च 2034
- होली — 6 मार्च 2034
- चैत्र नवरात्रि प्रारंभ — 21 मार्च 2034
- राम नवमी — 28 मार्च 2034
- अक्षय तृतीया — 21 अप्रैल 2034
- जगन्नाथ रथ यात्रा — 17 जुलाई 2034
- गुरु पूर्णिमा — 31 जुलाई 2034
- रक्षा बंधन — 29 अगस्त 2034
- कृष्ण जन्माष्टमी — 5 सितंबर 2034
- हरतालिका तीज — 15 सितंबर 2034
- गणेश चतुर्थी — 16 सितंबर 2034
- अनंत चतुर्दशी — 27 सितंबर 2034
- पितृ पक्ष प्रारंभ — 28 सितंबर 2034
- शारदीय नवरात्रि प्रारंभ — 13 अक्टूबर 2034
- दुर्गा अष्टमी — 20 अक्टूबर 2034
- महानवमी — 22 अक्टूबर 2034
- दशहरा / विजयादशमी — 22 अक्टूबर 2034
- करवा चौथ — 30 अक्टूबर 2034
- धनतेरस — 8 नवंबर 2034
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) — 9 नवंबर 2034
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा) — 10 नवंबर 2034
- गोवर्धन पूजा — 12 नवंबर 2034
- भाई दूज — 13 नवंबर 2034
- छठ पूजा — 17 नवंबर 2034
- कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) — 25 नवंबर 2034
- गुरु नानक जयंती — 25 नवंबर 2034
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