Festival Calendar

वट सावित्री व्रत 2025

ज्येष्ठ अमावस्या को सुहागिनें वट वृक्ष की परिक्रमा कर पति की दीर्घायु माँगती हैं।

इस वर्ष की तिथि देखें — वट सावित्री व्रत 2026 कब है
वट सावित्री व्रत 2025 date
मंगलवार, 27 मई 2025
Tithi: ज्येष्ठ अमावस्या
Tithi window: 12:09 PM, सोमवार, 26 मई 2025 → 08:30 AM, मंगलवार, 27 मई 2025

मुहूर्त और समय

काशी/IST · खगोलीय गणना
  • संकल्प (सूर्योदय)05:08
  • सूर्यास्त18:41
  • व्रत अवधि (तिथि)2025-05-26 · 12:09 → 08:30
  • पारण (तिथि समाप्ति)08:30

Festival days follow the classical attribution rules — udaya (sunrise), pradosha (evening), nishita (midnight), madhyahna or aparahna vyapini as each festival prescribes — computed for Kashi/Varanasi (IST). Regional observance can differ by a day in some years.

वट सावित्री व्रत की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ें

वट सावित्री व्रत — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वट सावित्री व्रत कब रखा जाता है?

उत्तर भारत में ज्येष्ठ की अमावस्या को; महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण के कुछ भागों में एक पखवाड़े बाद पूर्णिमा को (वट पूर्णिमा)। दोनों उसी सावित्री कथा का सम्मान करते हैं; इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।

बरगद वृक्ष की पूजा क्यों होती है?

बरगद दीर्घजीवी और स्वयं-नवीकरणशील है — हवाई जड़ें उतारकर अनंत रूप से फैलता। यह सावित्री का वृक्ष है, जिसके नीचे उन्होंने जागरण किया, और उसकी सहनशीलता ही विवाह हेतु माँगा गया आशीष है।

वृक्ष पर सूत बाँधने का क्या अर्थ है?

कच्चा सूत परिक्रमा करते हुए सात या 108 बार बाँधना कामना को वृक्ष से जोड़ता है — यह प्रार्थना कि विवाह का बंधन वैसे ही टिके जैसे बरगद टिकता है, अखंड और चिरस्थायी।

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