आषाढ़ 1912 आरंभ व समाप्ति तिथि (आषाढ़ मास)
उत्तर भारत (पूर्णिमांत): शुक्रवार, 31 मई 1912 – सोमवार, 29 जुलाई 1912
अमांत क्षेत्र: रविवार, 16 जून 1912 – सोमवार, 12 अगस्त 1912
चातुर्मास के आरंभ का मास — जगन्नाथ रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और देवशयनी एकादशी।
आषाढ़ (आषाढ़ मास) 1912 तिथियाँ
आषाढ़ का महत्व — भगवान विष्णु
आषाढ़ वर्षा और चातुर्मास की देहरी है — वे चार मास जिनमें विष्णु शयन करते हैं, देवशयनी एकादशी से आरंभ, जब विवाह और नए कार्य रुक जाते हैं। यह पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा और गुरु पूर्णिमा धारण करता है — गुरु को समर्पित पूर्णिमा, जब व्यास पूजे जाते हैं और शिष्य मार्ग दिखाने वाले को नमन करता है।
आषाढ़ के अनुष्ठान
- देवशयनी एकादशी — चातुर्मास व्रतों का आरंभ
- पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा
- गुरु पूर्णिमा — गुरु और व्यास की पूजा
- चातुर्मास का कोई अनुशासन या व्रत धारण करना
- दीक्षितों हेतु गुप्त नवरात्रि
- योगिनी और देवशयनी एकादशी का व्रत
आषाढ़ 1912 के प्रमुख दिन
आषाढ़ 1912 के पर्व
मासिक व्रत 1912
आषाढ़ 1912 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आषाढ़ मास 1912 कब से शुरू है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में आषाढ़ शुक्रवार, 31 मई 1912 से सोमवार, 29 जुलाई 1912 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह रविवार, 16 जून 1912 से सोमवार, 12 अगस्त 1912 तक रहता है।
उत्तर और दक्षिण भारत में आषाढ़ की तिथियाँ अलग क्यों हैं?
क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।
आषाढ़ 1912 किसे समर्पित है?
आषाढ़ वर्षा और चातुर्मास की देहरी है — वे चार मास जिनमें विष्णु शयन करते हैं, देवशयनी एकादशी से आरंभ, जब विवाह और नए कार्य रुक जाते हैं। यह पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा और गुरु पूर्णिमा धारण करता है — गुरु को समर्पित पूर्णिमा, जब व्यास पूजे जाते हैं और शिष्य मार्ग दिखाने वाले को नमन करता है।
आषाढ़ शिवरात्रि 1912 कब है?
आषाढ़ शिवरात्रि 1912 — आषाढ़ मास की मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) — शुक्रवार, 14 जून 1912 को है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और रात्रि-पूजन का विशेष महत्व है।
क्या आषाढ़ 1912 अधिक मास है?
हाँ। 1912 में अधिक (मल) मास पड़ने से आषाढ़ लगभग दोगुना — 60 दिन — लंबा है।