माघ मास · भगवान विष्णु एवं सूर्य

माघ 1914 आरंभ व समाप्ति तिथि (माघ मास)

उत्तर भारत (पूर्णिमांत): मंगलवार, 13 जनवरी 1914मंगलवार, 10 फ़रवरी 1914

अमांत क्षेत्र: मंगलवार, 27 जनवरी 1914मंगलवार, 24 फ़रवरी 1914

माघ स्नान और कल्पवास का मास — मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी।

माघ 2026 देखें — इस वर्ष

माघ (माघ मास) 1914 तिथियाँ

उत्तर भारत · पूर्णिमांत
मंगलवार, 13 जनवरी 1914
से मंगलवार, 10 फ़रवरी 1914 · 29 दिन
पूर्णिमा पर समाप्त होने वाला मास
अमांत क्षेत्र
मंगलवार, 27 जनवरी 1914
से मंगलवार, 24 फ़रवरी 1914 · 29 दिन
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु
तिथियाँ भिन्न क्यों? पूर्णिमांत पंचांग में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अमांत में अमावस्या पर। इस कारण उत्तर भारत में माघ अमांत क्षेत्रों से लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है — यद्यपि पर्व एक ही दिन पड़ते हैं, क्योंकि वे तिथि पर आधारित हैं।

माघ का महत्व — भगवान विष्णु एवं सूर्य

माघ पवित्र स्नान का महान मास है। मास भर प्रयाग में स्नान — कल्पवास, जब भक्त संगम-तट पर तपमय जीवन बिताते हैं — जन्म-जन्मांतर के कर्म धो देता है माना जाता है। यह मकर संक्रांति से आरंभ होता है जब सूर्य उत्तरायण होता है, मौन मौनी अमावस्या स्नान धारण करता है, और वसंत पंचमी तक पहुँचता है — वसंत का प्रथम दिन और सरस्वती की पूजा।

माघ के अनुष्ठान

  • माघ स्नान — प्रतिदिन भोर-पूर्व पवित्र स्नान, विशेषतः प्रयाग में
  • कल्पवास — संगम पर मास-पर्यंत तपमय निवास
  • तिल-गुड़ दान और तिल अर्पण
  • मकर संक्रांति से सूर्य अर्घ्य
  • मौन मौनी अमावस्या स्नान
  • वसंत पंचमी को सरस्वती पूजा
  • जया और विजया एकादशी का व्रत

माघ 1914 के प्रमुख दिन

माघ 1914 के पर्व

मासिक व्रत 1914

माघ 1914 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माघ मास 1914 कब से शुरू है?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में माघ मंगलवार, 13 जनवरी 1914 से मंगलवार, 10 फ़रवरी 1914 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह मंगलवार, 27 जनवरी 1914 से मंगलवार, 24 फ़रवरी 1914 तक रहता है।

उत्तर और दक्षिण भारत में माघ की तिथियाँ अलग क्यों हैं?

क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।

माघ 1914 किसे समर्पित है?

माघ पवित्र स्नान का महान मास है। मास भर प्रयाग में स्नान — कल्पवास, जब भक्त संगम-तट पर तपमय जीवन बिताते हैं — जन्म-जन्मांतर के कर्म धो देता है माना जाता है। यह मकर संक्रांति से आरंभ होता है जब सूर्य उत्तरायण होता है, मौन मौनी अमावस्या स्नान धारण करता है, और वसंत पंचमी तक पहुँचता है — वसंत का प्रथम दिन और सरस्वती की पूजा।

माघ शिवरात्रि 1914 कब है?

माघ शिवरात्रि 1914 — माघ मास की मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) — रविवार, 25 जनवरी 1914 को है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और रात्रि-पूजन का विशेष महत्व है।

क्या माघ 1914 अधिक मास है?

नहीं। माघ 1914 एक सामान्य 29-दिवसीय मास है।