वैशाख (वैशाख मास) 2004
अक्षय तृतीया और बुद्ध पूर्णिमा का मास — पवित्र स्नान और अक्षय पुण्य का।
वैशाख (वैशाख मास) 2004 तिथियाँ
वैशाख का महत्व — भगवान विष्णु (मधुसूदन)
वैशाख जल और पुण्य का मास है, जो विष्णु को मधुसूदन रूप में पूजता है। इसकी अक्षय तृतीया वर्ष के सर्वाधिक शुभ दिनों में है — इस पर आरंभ, दान या क्रय किया गया कुछ भी कभी क्षीण नहीं होता माना जाता है। यह बुद्ध पूर्णिमा पर समाप्त होता है — वह पूर्णिमा जो बुद्ध के जन्म, बोधि और निर्वाण को दर्शाती है, और मास भर भोर-पूर्व वैशाख स्नान चलता है।
वैशाख के अनुष्ठान
- वैशाख स्नान — मास भर प्रतिदिन पवित्र स्नान
- अक्षय तृतीया — आरंभ, स्वर्ण और दान
- दान में जल, सत्तू और शीतल पदार्थ
- सीता नवमी और नरसिंह जयंती व्रत
- बुद्ध पूर्णिमा पूजा और स्नान
- वरूथिनी और मोहिनी एकादशी का व्रत
वैशाख 2004 के प्रमुख दिन
वैशाख 2004 के पर्व
मासिक व्रत 2004
वैशाख 2004 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वैशाख मास 2004 कब से शुरू है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में वैशाख मंगलवार, 6 अप्रैल 2004 से मंगलवार, 4 मई 2004 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह मंगलवार, 20 अप्रैल 2004 से बुधवार, 19 मई 2004 तक रहता है।
उत्तर और दक्षिण भारत में वैशाख की तिथियाँ अलग क्यों हैं?
क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।
वैशाख 2004 किसे समर्पित है?
वैशाख जल और पुण्य का मास है, जो विष्णु को मधुसूदन रूप में पूजता है। इसकी अक्षय तृतीया वर्ष के सर्वाधिक शुभ दिनों में है — इस पर आरंभ, दान या क्रय किया गया कुछ भी कभी क्षीण नहीं होता माना जाता है। यह बुद्ध पूर्णिमा पर समाप्त होता है — वह पूर्णिमा जो बुद्ध के जन्म, बोधि और निर्वाण को दर्शाती है, और मास भर भोर-पूर्व वैशाख स्नान चलता है।
क्या वैशाख 2004 अधिक मास है?
नहीं। वैशाख 2004 एक सामान्य 29-दिवसीय मास है।