शारदीय नवरात्रि 1985
महान शरद नवरात्रि — आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को घटस्थापना से नौ रात्रि दुर्गा-आराधना, जो दशहरा पर समाप्त होती है।
घटस्थापना: मंगलवार, 15 अक्टूबर 1985 · 9 रात्रि
शारदीय नवरात्रि का महत्व
शारदीय नवरात्रि वर्ष की चार नवरात्रियों में सबसे बड़ी है। यह देवी के महिषासुर से नौ-रात्रि युद्ध का स्मरण है, जो दसवें दिन प्रातः विजयादशमी पर जीता गया। पूर्व में यही दिन दुर्गा पूजा हैं; दसवें दिन उत्तर भर में रावण पर राम की विजय का पुतला-दहन होता है।
प्रत्येक रात्रि दुर्गा के नौ स्वरूपों में से एक को समर्पित है, शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक क्रमशः पूजित। घटस्थापना पर बोए जौ नौ दिन अंकुरित होते हैं, और अष्टमी-नवमी को कन्या पूजन होता है, जहाँ बालिकाएँ जीवंत देवी रूप में पूजी और भोजित की जाती हैं।
नौ दिन, नौ स्वरूप
शैलपुत्री
· पर्वतराज की पुत्रीप्रथम स्वरूप — हिमवान की पुत्री पार्वती, नंदी पर सवार, त्रिशूल और कमल धारिणी। वे सबकी मूल हैं, घटस्थापना पर सर्वप्रथम पूजी जाती हैं।
ब्रह्मचारिणी
· तप करने वालीतपस्या का स्वरूप — नंगे पाँव, माला और कमंडल धारिणी, जिन्होंने तप से शिव को पाया। वे संयम, भक्ति और स्थिरता देती हैं।
चंद्रघंटा
· मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र धारिणीदस भुजाओं वाली, मस्तक पर घंटे-सम अर्धचंद्र, बाघ पर सवार। उनकी ध्वनि असुरों को भगाती है; वे साहस देती हैं और भय-शोक दूर करती हैं।
कूष्मांडा
· ब्रह्मांड को जन्म देने वालीवह मुस्कान जिसने शून्य को प्रकाशित किया — अष्टभुजा, सिंहवाहिनी, जिन्होंने हास्य से ब्रह्मांड रचा। वे स्वास्थ्य, बल और तेज देती हैं।
स्कंदमाता
· स्कंद (कार्तिकेय) की मातामाता, गोद में शिशु स्कंद लिए, सिंह पर विराजमान। संतान के कल्याण और गृह-शांति हेतु पूजी जाती हैं।
कात्यायनी
· ऋषि कात्यायन की पुत्रीमहिषासुर-वध हेतु ऋषियों के सम्मिलित तेज से उत्पन्न योद्धा स्वरूप। उग्र और स्वर्णिम, वे विवाह की बाधाएँ दूर कर योग्य वर देती हैं।
कालरात्रि
· काल का अंत करने वाली रात्रिसर्वाधिक उग्र स्वरूप — रात्रि-सम श्यामवर्णा, गर्दभ पर सवार, असुरों और समस्त भय की नाशिनी। भक्तों के लिए शुभंकरी कहलाती हैं।
महागौरी
· अत्यंत गौर वर्ण वालीपुनः प्राप्त पवित्रता — तप के पश्चात श्वेतवर्णा, वृषभ पर सवार, शांत और क्षमाशील। अष्टमी को कन्या पूजन में बालिकाएँ उनका जीवंत रूप मानी जाती हैं।
सिद्धिदात्री
· सिद्धियों की दात्रीअंतिम स्वरूप, कमल पर विराजमान, समस्त सिद्धियों की दात्री — शिव ने भी उन्हीं से सिद्धियाँ पाईं। नवमी नौ का पूर्ण कर विजयादशमी हेतु तैयार करती है।
शारदीय नवरात्रि 1985 के प्रमुख दिन
घटस्थापना मुहूर्त
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)05:56
- सूर्यास्त17:30
- व्रत अवधि (तिथि)1985-10-14 · 10:10 → 06:34
- पारण (तिथि समाप्ति)06:34
आज का पंचांग
काशी संदर्भ · तुरंत गणना- तिथि
- नवमी
- तक 16:43
- नक्षत्र
- कृत्तिका
- तक 18:47
- योग
- वृद्धि
- करण
- तैतिल
- सूर्योदय
- 05:27
- सूर्यास्त
- 18:40
- चंद्र राशि
- वृषभ
- सूर्य राशि
- कर्क
शारदीय नवरात्रि 1985 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शारदीय नवरात्रि 1985 कब से शुरू है?
शारदीय नवरात्रि 1985 की घटस्थापना मंगलवार, 15 अक्टूबर 1985 को है, और नौ रात्रि मंगलवार, 22 अक्टूबर 1985 तक चलती हैं।
नवरात्रि की नौ देवियाँ कौन हैं?
शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री — दुर्गा के नौ स्वरूप, जो क्रमशः प्रतिदिन एक पूजे जाते हैं।
घटस्थापना मुहूर्त 1985 क्या है?
घटस्थापना मंगलवार, 15 अक्टूबर 1985 को की जाती है, प्रतिपदा तिथि के प्रथम तृतीयांश में। सटीक मुहूर्त इस पृष्ठ के "मुहूर्त और समय" खंड में काशी/IST संदर्भ से दिया गया है।
दशहरा 1985 कब है?
विजयादशमी (दशहरा) मंगलवार, 22 अक्टूबर 1985 को है — नवरात्रि के दसवें दिन।
अब भी प्रश्न हैं?
Tara से पूछें — शारदीय नवरात्रि पर आपके प्रश्नों के उत्तर, आपकी भाषा में।
- क्या अविवाहित लड़कियाँ शारदीय नवरात्रि का व्रत रख सकती हैं?
- क्या गर्भवती महिलाएँ शारदीय नवरात्रि की पूजा कर सकती हैं?
- शारदीय नवरात्रि की तिथि महाराष्ट्र में अलग क्यों होती है?
- शारदीय नवरात्रि पर कौन सा मंत्र जपें?
- मेरे शहर में शारदीय नवरात्रि की पूजा का समय क्या है?