Festival Calendar

अहोई अष्टमी 1963

संतान हेतु माताओं का व्रत, तारों के दर्शन पर पारण।

इस वर्ष की तिथि देखें — अहोई अष्टमी 2026 कब है
अहोई अष्टमी has no occurrence in 1963 by the computed rules — check the adjacent years.

Festival days follow the classical attribution rules — udaya (sunrise), pradosha (evening), nishita (midnight), madhyahna or aparahna vyapini as each festival prescribes — computed for Kashi/Varanasi (IST). Regional observance can differ by a day in some years.

अहोई अष्टमी की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ें

अहोई अष्टमी — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहोई अष्टमी कब रखी जाती है?

कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को, दीवाली से आठ दिन पूर्व और करवा चौथ के लगभग चार दिन पश्चात। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।

व्रत तारों पर खोला जाता है या चंद्र पर?

परंपरा से तारों (सप्तर्षि) के दर्शन पर, करवा से अर्घ्य देकर। पंजाब और हरियाणा के कुछ भागों में यह चंद्रोदय पर खोला जाता है, जो रात्रि में बहुत बाद आता है।

अहोई अष्टमी व्रत कौन रखता है?

माताएँ इसे संतान की दीर्घायु और कल्याण हेतु रखती हैं। संतान की कामना करने वाली स्त्रियाँ भी इसे रखती हैं, अहोई माता — संतान की रक्षिका पार्वती स्वरूप — से प्रार्थना करती हुई।

चाँदी की स्याऊ क्या है?

देवी का प्रतिनिधित्व करने वाली चाँदी के मनकों की एक छोटी माला, जो अहोई चित्र सहित पूजी जाती है। प्रायः प्रति वर्ष एक मनका जोड़ा जाता है और माला परिवार में सौंपी जाती है; इसे पूर्ण रखा जाता है।