अनंत चतुर्दशी 2044
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी — अनंत सूत्र पूजन व गणेश विसर्जन।
आज का पंचांग
काशी संदर्भ · तुरंत गणना- तिथि
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मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)05:40
- सूर्यास्त18:12
- व्रत अवधि (तिथि)2044-09-05 · 14:48 → 16:07
- पारण (तिथि समाप्ति)16:07
Festival days follow the classical attribution rules — udaya (sunrise), pradosha (evening), nishita (midnight), madhyahna or aparahna vyapini as each festival prescribes — computed for Kashi/Varanasi (IST). Regional observance can differ by a day in some years.
अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंअनंत चतुर्दशी — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अनंत चतुर्दशी कब मनाई जाती है?
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को, वर्षा ऋतु के अंत में — शुक्ल पक्ष का चौदहवाँ दिन, गणेश चतुर्थी के दस दिन पश्चात। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।
अनंत सूत्र क्या है और कैसे बाँधा जाता है?
हल्दी से रँगा सूती या रेशमी धागा, चौदह गाँठों सहित, पूजन के पश्चात भुजा पर अनंत की रक्षा के व्रत रूप में धारण किया जाता है। सामान्य प्रथा में पुरुष दाहिनी और स्त्रियाँ बाईं भुजा पर बाँधती हैं, और पिछले वर्ष का सूत्र पहले उतार दिया जाता है।
इस दिन गणेश विसर्जन क्यों होता है?
अनंत चतुर्दशी गणेशोत्सव का दसवाँ और अंतिम दिन है, जो गणेश चतुर्थी से आरंभ होता है। स्थापित गणेश प्रतिमा को शोभायात्रा में ले जाकर विसर्जित किया जाता है, इस प्रार्थना के साथ कि वे अगले वर्ष पुनः पधारें।
अनंत चतुर्दशी को किस देव की पूजा होती है?
अनंत — विष्णु का अंतहीन रूप, शेषनाग पर शयन करते हुए। व्रत और चौदह-गाँठ का सूत्र दोनों उस असीम का सम्मान करते हैं जो चौदह लोकों को धारण करते हैं।
Other major festivals in 2044
- मकर संक्रांति — 15 जनवरी 2044
- वसंत पंचमी — 4 फ़रवरी 2044
- महाशिवरात्रि — 27 फ़रवरी 2044
- होलिका दहन — 13 मार्च 2044
- होली — 14 मार्च 2044
- चैत्र नवरात्रि प्रारंभ — 30 मार्च 2044
- राम नवमी — 6 अप्रैल 2044
- अक्षय तृतीया — 30 अप्रैल 2044
- जगन्नाथ रथ यात्रा — 27 जून 2044
- गुरु पूर्णिमा — 10 जुलाई 2044
- नाग पंचमी — 29 जुलाई 2044
- रक्षा बंधन — 8 अगस्त 2044
- कृष्ण जन्माष्टमी — 16 अगस्त 2044
- हरतालिका तीज — 25 अगस्त 2044
- गणेश चतुर्थी — 26 अगस्त 2044
- पितृ पक्ष प्रारंभ — 8 सितंबर 2044
- शारदीय नवरात्रि प्रारंभ — 22 सितंबर 2044
- दुर्गा अष्टमी — 29 सितंबर 2044
- महानवमी — 30 सितंबर 2044
- दशहरा / विजयादशमी — 1 अक्टूबर 2044
- करवा चौथ — 10 अक्टूबर 2044
- धनतेरस — 18 अक्टूबर 2044
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) — 19 अक्टूबर 2044
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा) — 20 अक्टूबर 2044
- गोवर्धन पूजा — 21 अक्टूबर 2044
- भाई दूज — 22 अक्टूबर 2044
- छठ पूजा — 27 अक्टूबर 2044
- कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) — 5 नवंबर 2044
- गुरु नानक जयंती — 5 नवंबर 2044
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