Festival Calendar

देवशयनी एकादशी 2051

भगवान विष्णु शयन में जाते हैं; चातुर्मास प्रारंभ।

देवशयनी एकादशी 2051 date
बुधवार, 19 जुलाई 2051
Tithi: आषाढ़ शुक्ल एकादशी
Tithi window: 10:22 PM, मंगलवार, 18 जुलाई 2051 → 11:43 PM, बुधवार, 19 जुलाई 2051
देवशयनी एकादशी 2051
आरंभ में
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आज का पंचांग

काशी संदर्भ · तुरंत गणना
तिथि
अष्टमी
तक 18:59
नक्षत्र
भरणी
तक 20:18
योग
गण्ड
करण
बालव
सूर्योदय
05:27
सूर्यास्त
18:40
चंद्र राशि
मेष
सूर्य राशि
कर्क

मुहूर्त और समय

काशी/IST · खगोलीय गणना
  • संकल्प (सूर्योदय)05:18
  • सूर्यास्त18:50
  • व्रत अवधि (तिथि)2051-07-18 · 22:22 → 23:43
  • पारण (तिथि समाप्ति)23:43

Festival days follow the classical attribution rules — udaya (sunrise), pradosha (evening), nishita (midnight), madhyahna or aparahna vyapini as each festival prescribes — computed for Kashi/Varanasi (IST). Regional observance can differ by a day in some years.

देवशयनी एकादशी की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ें

देवशयनी एकादशी — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवशयनी एकादशी कब है?

आषाढ़ की शुक्ल एकादशी को, प्रायः जून–जुलाई में, वर्षा के आरंभ पर। यह चातुर्मास, चार पवित्र मास, आरंभ करती है, जो कार्तिक की देवउठनी एकादशी पर समाप्त होते हैं। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।

देवशयनी एकादशी के बाद विवाह क्यों रुक जाते हैं?

इस दिन से विष्णु चातुर्मास भर शयन करते माने जाते हैं, और शुभ नए कार्य — विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञोपवीत — तब तक रुके रहते हैं जब वे लगभग चार मास बाद कार्तिक की देवउठनी एकादशी को जागते हैं।

चातुर्मास व्रत क्या है?

देवशयनी एकादशी से लिया और चार मास रखा एक अनुशासन — कोई विशेष भोजन त्यागना, दैनिक जप या अध्ययन, अथवा सेवा रखना। परंपरागत सूचियाँ क्रमिक मासों में पत्तेदार साग, दही, दूध और दाल त्यागती हैं।

महाराष्ट्र में आषाढ़ी एकादशी क्या है?

वही दिन। यह पंढरपुर वारी की परिणति है, जब लाखों वारकरी संत ज्ञानेश्वर और तुकाराम की पालकियाँ लिए पंढरपुर चलते हैं, देव विट्ठल के सम्मुख खड़े होने।

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