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मकर संक्रांति 1934

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश — पतंग, तिल-गुड़ और पवित्र स्नान का पर्व; दक्षिण भारत में पोंगल।

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मकर संक्रांति 1934 date
रविवार, 14 जनवरी 1934
Tithi: सौर पर्व — संक्रांति
Sankranti moment: 12:29 AM (IST)

मुहूर्त और समय

काशी/IST · खगोलीय गणना
  • संक्रांति क्षण00:29

Festival days follow the classical attribution rules — udaya (sunrise), pradosha (evening), nishita (midnight), madhyahna or aparahna vyapini as each festival prescribes — computed for Kashi/Varanasi (IST). Regional observance can differ by a day in some years.

मकर संक्रांति की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ें

मकर संक्रांति — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मकर संक्रांति प्रायः एक ही तारीख को क्यों पड़ती है?

यह सौर पर्व है, जो सूर्य के निरयण मकर-प्रवेश से निश्चित होता है, किसी चंद्र तिथि से नहीं। चंद्र-पर्व सिविल कैलेंडर के सापेक्ष खिसकते हैं; यह नहीं।

पुण्य काल क्या है?

संक्रांति के क्षण से गिनी जाने वाली वह पुण्य-अवधि जिसमें स्नान और दान पर्व का पूर्ण फल देते हैं। संक्रांति सूर्यास्त के पश्चात हो तो यह अगले प्रातः चली जाती है।

इस दिन तिल और गुड़ क्यों दिए जाते हैं?

तिल-गुड़ इस भाव से बाँटे जाते हैं कि देने और लेने वाले के बीच वाणी मधुर रहे। दान — तिल, गुड़, कंबल अथवा अन्न का — इस दिन का केंद्रीय कर्म है।

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