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होलिका दहन 1934

होली की पूर्व संध्या का दहन, सूर्यास्त के बाद पूर्णिमा व्याप्त रहते जलाया जाता है।

इस वर्ष की तिथि देखें — होलिका दहन 2026 कब है
होलिका दहन 1934 date
बुधवार, 28 फ़रवरी 1934
Tithi: फाल्गुन पूर्णिमा
Tithi window: 02:37 PM, बुधवार, 28 फ़रवरी 1934 → 03:56 PM, गुरुवार, 1 मार्च 1934

मुहूर्त और समय

काशी/IST · खगोलीय गणना
  • संकल्प (सूर्योदय)06:21
  • प्रदोष पूजा मुहूर्त17:59 – 20:23
  • व्रत अवधि (तिथि)14:37 → 1934-03-01 · 15:56
  • पारण (तिथि समाप्ति)15:561934-03-01

Festival days follow the classical attribution rules — udaya (sunrise), pradosha (evening), nishita (midnight), madhyahna or aparahna vyapini as each festival prescribes — computed for Kashi/Varanasi (IST). Regional observance can differ by a day in some years.

होलिका दहन की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ें

होलिका दहन — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होलिका दहन कब है?

फाल्गुन की पूर्णिमा को, रंगों की होली से पूर्व संध्या। अग्नि सूर्यास्त के पश्चात प्रदोष मुहूर्त में जलाई जाती है, और सटीक समय तिथि तथा भद्रा-वर्जन से निर्धारित होता है। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।

होलिका दहन पर अग्नि क्यों जलाई जाती है?

यह होलिका के दहन और प्रह्लाद की रक्षा का पुनराभिनय है — अभिमान पर भक्ति की विजय। यह शीत-अंत का शुष्क कचरा भी साफ करती है और, प्रतीकात्मक रूप से, अगले दिन के रंग-खेल से पूर्व वर्ष की बुराई तथा अहंकार जलाती है।

भद्रा काल क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

भद्रा (विष्टि करण) होलिका अग्नि जलाने हेतु अशुभ माना जाता है। दहन प्रदोष बेला में भद्रा से बचते हुए किया जाता है, अतः मुहूर्त साधारण 'सूर्यास्त के पश्चात' से एक-दो घंटे भिन्न हो सकता है।

क्या होलिका दहन और होली एक ही हैं?

वे एक पर्व के दो अंग हैं: होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा रात्रि की अग्नि (छोटी होली) है; रंगों का खेल (रंगवाली होली या धुलेटी) अगले प्रातः।

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