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रक्षा बंधन 1944

श्रावण पूर्णिमा को बहनें राखी बाँधती हैं (भद्रा रहित काल में)।

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रक्षा बंधन 1944 date
शुक्रवार, 4 अगस्त 1944
Tithi: श्रावण पूर्णिमा
Tithi window: 09:18 PM, गुरुवार, 3 अगस्त 1944 → 06:12 PM, शुक्रवार, 4 अगस्त 1944

मुहूर्त और समय

काशी/IST · खगोलीय गणना
  • संकल्प (सूर्योदय)05:26
  • सूर्यास्त18:41
  • व्रत अवधि (तिथि)1944-08-03 · 21:18 → 18:12
  • पारण (तिथि समाप्ति)18:12

Festival days follow the classical attribution rules — udaya (sunrise), pradosha (evening), nishita (midnight), madhyahna or aparahna vyapini as each festival prescribes — computed for Kashi/Varanasi (IST). Regional observance can differ by a day in some years.

रक्षा बंधन की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ें

रक्षा बंधन — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या भद्रा काल में राखी बाँधी जा सकती है?

नहीं। इस कर्म हेतु भद्रा पूर्णतः वर्जित है। श्रावण पूर्णिमा प्रायः भद्रा के साथ आरंभ होती है, अतः मुहूर्त प्रायः अपराह्न में खुलता है — अपराह्न श्रेष्ठ, प्रदोष विकल्प।

राखी किस कलाई पर बाँधी जाती है?

दाहिनी कलाई पर, जब भाई पूर्वाभिमुख बैठा हो और बहन पश्चिमाभिमुख हो।

क्या रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के लिए है?

व्यवहार में प्रायः हाँ। प्राचीन ग्रंथों में रक्षा सूत्र पुरोहित द्वारा यजमान को और पत्नी द्वारा पति को भी बाँधा जाता था — जो भी रक्षा दे या माँगे।

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