सावन (श्रावण मास) 2023
शिव का सर्वाधिक पवित्र मास — सावन सोमवार व्रत, कांवड़ यात्रा और रुद्राभिषेक का मास।
सावन (श्रावण मास) 2023 तिथियाँ
सावन का महत्व — भगवान शिव
श्रावण शिव का मास है। यह वर्षा के चरम पर पड़ता है, जब धरती हरी होती है और समुद्र-मंथन स्मरण किया जाता है — शिव ने सृष्टि की रक्षा हेतु इसी ऋतु में हलाहल विष पिया, और मास के जलार्पण उस जलते कंठ को शीतल करते हैं। प्रत्येक सोमवार सावन सोमवार व्रत रखा जाता है, और श्रद्धालु पैदल गंगाजल (कांवड़ यात्रा) लाकर लिंग पर चढ़ाते हैं।
सावन के अनुष्ठान
- प्रत्येक सोमवार सावन सोमवार व्रत
- शिवलिंग का रुद्राभिषेक और जलाभिषेक
- कांवड़ यात्रा — पैदल गंगाजल लाना
- बेल-पत्र, धतूरा और श्वेत पुष्प अर्पण
- शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ
- मंगलवार को सुहागिनों का मंगला गौरी व्रत
सावन 2023 के प्रमुख दिन
सावन सोमवार व्रत
सावन 2023 के पर्व
मासिक व्रत 2023
सावन 2023 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रावण मास 2023 कब से शुरू है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में सावन मंगलवार, 4 जुलाई 2023 से गुरुवार, 31 अगस्त 2023 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह मंगलवार, 18 जुलाई 2023 से शुक्रवार, 15 सितंबर 2023 तक रहता है।
उत्तर और दक्षिण भारत में सावन की तिथियाँ अलग क्यों हैं?
क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।
सावन 2023 किसे समर्पित है?
श्रावण शिव का मास है। यह वर्षा के चरम पर पड़ता है, जब धरती हरी होती है और समुद्र-मंथन स्मरण किया जाता है — शिव ने सृष्टि की रक्षा हेतु इसी ऋतु में हलाहल विष पिया, और मास के जलार्पण उस जलते कंठ को शीतल करते हैं। प्रत्येक सोमवार सावन सोमवार व्रत रखा जाता है, और श्रद्धालु पैदल गंगाजल (कांवड़ यात्रा) लाकर लिंग पर चढ़ाते हैं।
क्या सावन 2023 अधिक मास है?
हाँ। 2023 में अधिक (मल) मास पड़ने से सावन लगभग दोगुना — 59 दिन — लंबा है।