श्रावण मास · भगवान शिव

सावन (श्रावण मास) 2037

शिव का सर्वाधिक पवित्र मास — सावन सोमवार व्रत, कांवड़ यात्रा और रुद्राभिषेक का मास।

सावन 2026 देखें — इस वर्ष

सावन (श्रावण मास) 2037 तिथियाँ

उत्तर भारत · पूर्णिमांत
मंगलवार, 28 जुलाई 2037
से मंगलवार, 25 अगस्त 2037 · 29 दिन
पूर्णिमा पर समाप्त होने वाला मास
अमांत क्षेत्र
बुधवार, 12 अगस्त 2037
से बुधवार, 9 सितंबर 2037 · 29 दिन
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु
तिथियाँ भिन्न क्यों? पूर्णिमांत पंचांग में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अमांत में अमावस्या पर। इस कारण उत्तर भारत में सावन अमांत क्षेत्रों से लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है — यद्यपि पर्व एक ही दिन पड़ते हैं, क्योंकि वे तिथि पर आधारित हैं।

सावन का महत्व — भगवान शिव

श्रावण शिव का मास है। यह वर्षा के चरम पर पड़ता है, जब धरती हरी होती है और समुद्र-मंथन स्मरण किया जाता है — शिव ने सृष्टि की रक्षा हेतु इसी ऋतु में हलाहल विष पिया, और मास के जलार्पण उस जलते कंठ को शीतल करते हैं। प्रत्येक सोमवार सावन सोमवार व्रत रखा जाता है, और श्रद्धालु पैदल गंगाजल (कांवड़ यात्रा) लाकर लिंग पर चढ़ाते हैं।

सावन के अनुष्ठान

  • प्रत्येक सोमवार सावन सोमवार व्रत
  • शिवलिंग का रुद्राभिषेक और जलाभिषेक
  • कांवड़ यात्रा — पैदल गंगाजल लाना
  • बेल-पत्र, धतूरा और श्वेत पुष्प अर्पण
  • शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ
  • मंगलवार को सुहागिनों का मंगला गौरी व्रत

सावन 2037 के प्रमुख दिन

सावन सोमवार व्रत

सावन 2037 के पर्व

मासिक व्रत 2037

सावन 2037 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रावण मास 2037 कब से शुरू है?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में सावन मंगलवार, 28 जुलाई 2037 से मंगलवार, 25 अगस्त 2037 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह बुधवार, 12 अगस्त 2037 से बुधवार, 9 सितंबर 2037 तक रहता है।

उत्तर और दक्षिण भारत में सावन की तिथियाँ अलग क्यों हैं?

क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।

सावन 2037 किसे समर्पित है?

श्रावण शिव का मास है। यह वर्षा के चरम पर पड़ता है, जब धरती हरी होती है और समुद्र-मंथन स्मरण किया जाता है — शिव ने सृष्टि की रक्षा हेतु इसी ऋतु में हलाहल विष पिया, और मास के जलार्पण उस जलते कंठ को शीतल करते हैं। प्रत्येक सोमवार सावन सोमवार व्रत रखा जाता है, और श्रद्धालु पैदल गंगाजल (कांवड़ यात्रा) लाकर लिंग पर चढ़ाते हैं।

क्या सावन 2037 अधिक मास है?

नहीं। सावन 2037 एक सामान्य 29-दिवसीय मास है।