शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1944

1944 की 49 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
16 जनवरीरविवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
17 जनवरीसोमवारहस्तसप्तमी
19 जनवरीबुधवारस्वातीअष्टमी
21 जनवरीशुक्रवारअनुराधादशमी
23 जनवरीरविवारमूलत्रयोदशी
30 जनवरीरविवाररेवतीषष्ठी

फ़रवरी

8 मुहूर्त
3 फ़रवरीगुरुवाररोहिणीदशमी
4 फ़रवरीशुक्रवारमृगशिराएकादशी
5 फ़रवरीशनिवारमृगशिराद्वादशी
10 फ़रवरीगुरुवारमघाप्रतिपदा
12 फ़रवरीशनिवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
16 फ़रवरीबुधवारस्वातीसप्तमी
20 फ़रवरीरविवारमूलएकादशी
26 फ़रवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदातृतीया

मार्च

3 मुहूर्त
2 मार्चगुरुवाररोहिणीअष्टमी
11 मार्चशनिवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
12 मार्चरविवारहस्तद्वितीया

अप्रैल

4 मुहूर्त
14 अप्रैलशुक्रवारमूलषष्ठी
16 अप्रैलरविवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
21 अप्रैलशुक्रवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
27 अप्रैलगुरुवारमृगशिरापंचमी

मई

8 मुहूर्त
4 मईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
5 मईशुक्रवारहस्तद्वादशी
10 मईबुधवारअनुराधाद्वितीया
13 मईशनिवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
18 मईगुरुवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
19 मईशुक्रवाररेवतीद्वादशी
24 मईबुधवारमृगशिराद्वितीया
29 मईसोमवारमघासप्तमी

जून

8 मुहूर्त
1 जूनगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
2 जूनशुक्रवारहस्तएकादशी
4 जूनरविवारस्वातीत्रयोदशी
8 जूनगुरुवारमूलद्वितीया
14 जूनबुधवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी
26 जूनसोमवारमघाषष्ठी
28 जूनबुधवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
29 जूनगुरुवारहस्तअष्टमी

जुलाई

1 मुहूर्त
1 जुलाईशनिवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

1 मुहूर्त
29 अक्टूबररविवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी

नवंबर

6 मुहूर्त
3 नवंबरशुक्रवाररोहिणीतृतीया
11 नवंबरशनिवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
12 नवंबररविवारहस्तद्वादशी
17 नवंबरशुक्रवारअनुराधाद्वितीया
26 नवंबररविवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
30 नवंबरगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा

दिसंबर

4 मुहूर्त
1 दिसंबरशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
6 दिसंबरबुधवारमघासप्तमी
8 दिसंबरशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
10 दिसंबररविवारहस्तदशमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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