शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1945

1945 की 47 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
19 जनवरीशुक्रवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
20 जनवरीशनिवाररेवतीसप्तमी
24 जनवरीबुधवाररोहिणीएकादशी
25 जनवरीगुरुवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

8 मुहूर्त
2 फ़रवरीशुक्रवारहस्तपंचमी
4 फ़रवरीरविवारस्वातीसप्तमी
5 फ़रवरीसोमवारस्वातीअष्टमी
7 फ़रवरीबुधवारअनुराधादशमी
9 फ़रवरीशुक्रवारमूलद्वादशी
15 फ़रवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
21 फ़रवरीबुधवारमृगशिरादशमी
26 फ़रवरीसोमवारमघापूर्णिमा

मार्च

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अप्रैल

5 मुहूर्त
16 अप्रैलसोमवाररोहिणीपंचमी
22 अप्रैलरविवारमघाएकादशी
25 अप्रैलबुधवारहस्तत्रयोदशी
27 अप्रैलशुक्रवारस्वातीपूर्णिमा
30 अप्रैलसोमवारअनुराधातृतीया

मई

10 मुहूर्त
2 मईबुधवारमूलपंचमी
4 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
9 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
10 मईगुरुवाररेवतीत्रयोदशी
13 मईरविवाररोहिणीद्वितीया
14 मईसोमवारमृगशिरातृतीया
19 मईशनिवारमघाअष्टमी
21 मईसोमवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
23 मईबुधवारहस्तद्वादशी
27 मईरविवारअनुराधापूर्णिमा

जून

7 मुहूर्त
6 जूनबुधवाररेवतीएकादशी
15 जूनशुक्रवारमघाषष्ठी
18 जूनसोमवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
21 जूनगुरुवारस्वातीएकादशी
23 जूनशनिवारअनुराधात्रयोदशी
25 जूनसोमवारमूलपूर्णिमा
27 जूनबुधवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया

जुलाई

5 मुहूर्त
2 जुलाईसोमवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
7 जुलाईशनिवाररोहिणीत्रयोदशी
15 जुलाईरविवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
16 जुलाईसोमवारहस्तसप्तमी
20 जुलाईशुक्रवारअनुराधादशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

5 मुहूर्त
17 नवंबरशनिवाररेवतीद्वादशी
21 नवंबरबुधवारमृगशिराद्वितीया
26 नवंबरसोमवारमघासप्तमी
29 नवंबरगुरुवारहस्तदशमी
30 नवंबरशुक्रवारहस्तएकादशी

दिसंबर

3 मुहूर्त
2 दिसंबररविवारस्वातीत्रयोदशी
6 दिसंबरगुरुवारमूलद्वितीया
14 दिसंबरशुक्रवाररेवतीदशमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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