शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1948

1948 की 52 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

7 मुहूर्त
17 जनवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
18 जनवरीरविवाररेवतीसप्तमी
19 जनवरीसोमवाररेवतीअष्टमी
23 जनवरीशुक्रवारमृगशिराद्वादशी
28 जनवरीबुधवारमघातृतीया
30 जनवरीशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
31 जनवरीशनिवारहस्तषष्ठी

फ़रवरी

8 मुहूर्त
2 फ़रवरीसोमवारस्वातीअष्टमी
4 फ़रवरीबुधवारअनुराधादशमी
6 फ़रवरीशुक्रवारमूलद्वादशी
15 फ़रवरीरविवाररेवतीपंचमी
20 फ़रवरीशुक्रवारमृगशिरादशमी
26 फ़रवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
27 फ़रवरीशुक्रवारहस्ततृतीया
29 फ़रवरीरविवारस्वातीपंचमी

मार्च

3 मुहूर्त
6 मार्चशनिवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी
12 मार्चशुक्रवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
13 मार्चशनिवाररेवतीतृतीया

अप्रैल

7 मुहूर्त
14 अप्रैलबुधवारमृगशिरापंचमी
19 अप्रैलसोमवारमघादशमी
21 अप्रैलबुधवारउत्तर फाल्गुनीत्रयोदशी
24 अप्रैलशनिवारस्वातीप्रतिपदा
26 अप्रैलसोमवारअनुराधातृतीया
28 अप्रैलबुधवारमूलपंचमी
30 अप्रैलशुक्रवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी

मई

6 मुहूर्त
6 मईगुरुवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
7 मईशुक्रवाररेवतीत्रयोदशी
16 मईरविवारमघाअष्टमी
19 मईबुधवारहस्तएकादशी
21 मईशुक्रवारस्वातीत्रयोदशी
23 मईरविवारअनुराधापूर्णिमा

जून

7 मुहूर्त
2 जूनबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
3 जूनगुरुवाररेवतीएकादशी
13 जूनरविवारमघासप्तमी
17 जूनगुरुवारस्वातीएकादशी
19 जूनशनिवारअनुराधात्रयोदशी
24 जूनगुरुवारउत्तर आषाढ़ातृतीया
30 जूनबुधवाररेवतीअष्टमी

जुलाई

4 मुहूर्त
4 जुलाईरविवाररोहिणीद्वादशी
5 जुलाईसोमवारमृगशिरात्रयोदशी
12 जुलाईसोमवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
15 जुलाईगुरुवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

8 मुहूर्त
13 नवंबरशनिवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
14 नवंबररविवाररेवतीत्रयोदशी
18 नवंबरगुरुवाररोहिणीद्वितीया
19 नवंबरशुक्रवारमृगशिरातृतीया
24 नवंबरबुधवारमघाअष्टमी
26 नवंबरशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
27 नवंबरशनिवारहस्तएकादशी
28 नवंबररविवारस्वातीत्रयोदशी

दिसंबर

2 मुहूर्त
2 दिसंबरगुरुवारमूलद्वितीया
11 दिसंबरशनिवाररेवतीदशमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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