शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1949

1949 की 46 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
17 जनवरीसोमवारमघातृतीया
19 जनवरीबुधवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
20 जनवरीगुरुवारहस्तषष्ठी
22 जनवरीशनिवारस्वातीअष्टमी
24 जनवरीसोमवारअनुराधाएकादशी
26 जनवरीबुधवारमूलत्रयोदशी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
3 फ़रवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
4 फ़रवरीशुक्रवाररेवतीषष्ठी
9 फ़रवरीबुधवारमृगशिराएकादशी
14 फ़रवरीसोमवारमघाप्रतिपदा
18 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीषष्ठी
20 फ़रवरीरविवारअनुराधाअष्टमी
24 फ़रवरीगुरुवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी

मार्च

4 मुहूर्त
2 मार्चबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
3 मार्चगुरुवाररेवतीतृतीया
7 मार्चसोमवाररोहिणीसप्तमी
13 मार्चरविवारमघात्रयोदशी

अप्रैल

4 मुहूर्त
14 अप्रैलगुरुवारस्वातीप्रतिपदा
18 अप्रैलसोमवारमूलषष्ठी
20 अप्रैलबुधवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
25 अप्रैलसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी

मई

7 मुहूर्त
1 मईरविवाररोहिणीतृतीया
9 मईसोमवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
13 मईशुक्रवारअनुराधाप्रतिपदा
15 मईरविवारमूलतृतीया
23 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
28 मईशनिवाररोहिणीप्रतिपदा
29 मईरविवारमृगशिराद्वितीया

जून

5 मुहूर्त
3 जूनशुक्रवारमघासप्तमी
6 जूनसोमवारहस्तदशमी
8 जूनबुधवारस्वातीद्वादशी
12 जूनरविवारमूलद्वितीया
19 जूनरविवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी

जुलाई

2 मुहूर्त
2 जुलाईशनिवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
3 जुलाईरविवारहस्तअष्टमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

9 मुहूर्त
2 नवंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
3 नवंबरगुरुवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
9 नवंबरबुधवारमृगशिरातृतीया
14 नवंबरसोमवारमघाअष्टमी
16 नवंबरबुधवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
17 नवंबरगुरुवारहस्तद्वादशी
21 नवंबरसोमवारअनुराधाप्रतिपदा
24 नवंबरगुरुवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
30 नवंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी

दिसंबर

2 मुहूर्त
1 दिसंबरगुरुवाररेवतीएकादशी
5 दिसंबरसोमवाररोहिणीपूर्णिमा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

अन्य वर्ष