जनवरी
6 मुहूर्त| 14 जनवरी | शनिवार | अनुराधा | एकादशी |
| 16 जनवरी | सोमवार | मूल | त्रयोदशी |
| 23 जनवरी | सोमवार | उत्तर भाद्रपदा | पंचमी |
| 25 जनवरी | बुधवार | रेवती | सप्तमी |
| 29 जनवरी | रविवार | रोहिणी | एकादशी |
| 30 जनवरी | सोमवार | मृगशिरा | द्वादशी |
फ़रवरी
5 मुहूर्त| 4 फ़रवरी | शनिवार | मघा | द्वितीया |
| 9 फ़रवरी | गुरुवार | स्वाती | सप्तमी |
| 13 फ़रवरी | सोमवार | मूल | द्वादशी |
| 20 फ़रवरी | सोमवार | उत्तर भाद्रपदा | तृतीया |
| 25 फ़रवरी | शनिवार | रोहिणी | अष्टमी |
मार्च
4 मुहूर्त| 5 मार्च | रविवार | उत्तर फाल्गुनी | प्रतिपदा |
| 6 मार्च | सोमवार | हस्त | द्वितीया |
| 8 मार्च | बुधवार | स्वाती | पंचमी |
| 10 मार्च | शुक्रवार | अनुराधा | सप्तमी |
अप्रैल
5 मुहूर्त| 15 अप्रैल | शनिवार | उत्तर भाद्रपदा | त्रयोदशी |
| 22 अप्रैल | शनिवार | मृगशिरा | पंचमी |
| 27 अप्रैल | गुरुवार | मघा | दशमी |
| 29 अप्रैल | शनिवार | उत्तर फाल्गुनी | द्वादशी |
| 30 अप्रैल | रविवार | हस्त | त्रयोदशी |
मई
11 मुहूर्त| 4 मई | गुरुवार | अनुराधा | तृतीया |
| 7 मई | रविवार | उत्तर आषाढ़ा | षष्ठी |
| 13 मई | शनिवार | उत्तर भाद्रपदा | द्वादशी |
| 14 मई | रविवार | रेवती | त्रयोदशी |
| 18 मई | गुरुवार | रोहिणी | प्रतिपदा |
| 19 मई | शुक्रवार | मृगशिरा | द्वितीया |
| 25 मई | गुरुवार | मघा | अष्टमी |
| 27 मई | शनिवार | उत्तर फाल्गुनी | दशमी |
| 28 मई | रविवार | हस्त | एकादशी |
| 29 मई | सोमवार | स्वाती | त्रयोदशी |
| 31 मई | बुधवार | अनुराधा | पूर्णिमा |
जून
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
जुलाई
7 मुहूर्त| 1 जुलाई | शनिवार | उत्तर आषाढ़ा | द्वितीया |
| 6 जुलाई | गुरुवार | उत्तर भाद्रपदा | सप्तमी |
| 7 जुलाई | शुक्रवार | रेवती | अष्टमी |
| 12 जुलाई | बुधवार | रोहिणी | द्वादशी |
| 13 जुलाई | गुरुवार | मृगशिरा | त्रयोदशी |
| 20 जुलाई | गुरुवार | उत्तर फाल्गुनी | पंचमी |
| 21 जुलाई | शुक्रवार | हस्त | षष्ठी |
अगस्त
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
सितंबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
अक्टूबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं
- सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
- तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
- वार मंगलवार न हो।
- दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
- सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।
प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।