शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1950

1950 की 43 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
14 जनवरीशनिवारअनुराधाएकादशी
16 जनवरीसोमवारमूलत्रयोदशी
23 जनवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
25 जनवरीबुधवाररेवतीसप्तमी
29 जनवरीरविवाररोहिणीएकादशी
30 जनवरीसोमवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

5 मुहूर्त
4 फ़रवरीशनिवारमघाद्वितीया
9 फ़रवरीगुरुवारस्वातीसप्तमी
13 फ़रवरीसोमवारमूलद्वादशी
20 फ़रवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
25 फ़रवरीशनिवाररोहिणीअष्टमी

मार्च

4 मुहूर्त
5 मार्चरविवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
6 मार्चसोमवारहस्तद्वितीया
8 मार्चबुधवारस्वातीपंचमी
10 मार्चशुक्रवारअनुराधासप्तमी

अप्रैल

5 मुहूर्त
15 अप्रैलशनिवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
22 अप्रैलशनिवारमृगशिरापंचमी
27 अप्रैलगुरुवारमघादशमी
29 अप्रैलशनिवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
30 अप्रैलरविवारहस्तत्रयोदशी

मई

11 मुहूर्त
4 मईगुरुवारअनुराधातृतीया
7 मईरविवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
13 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
14 मईरविवाररेवतीत्रयोदशी
18 मईगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
19 मईशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
25 मईगुरुवारमघाअष्टमी
27 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
28 मईरविवारहस्तएकादशी
29 मईसोमवारस्वातीत्रयोदशी
31 मईबुधवारअनुराधापूर्णिमा

जून

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

जुलाई

7 मुहूर्त
1 जुलाईशनिवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया
6 जुलाईगुरुवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
7 जुलाईशुक्रवाररेवतीअष्टमी
12 जुलाईबुधवाररोहिणीद्वादशी
13 जुलाईगुरुवारमृगशिरात्रयोदशी
20 जुलाईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
21 जुलाईशुक्रवारहस्तषष्ठी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

2 मुहूर्त
25 नवंबरशनिवाररोहिणीप्रतिपदा
26 नवंबररविवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

3 मुहूर्त
2 दिसंबरशनिवारमघासप्तमी
7 दिसंबरगुरुवारस्वातीत्रयोदशी
10 दिसंबररविवारमूलप्रतिपदा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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