शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1953

1953 की 43 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
16 जनवरीशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
21 जनवरीबुधवाररेवतीसप्तमी
25 जनवरीरविवाररोहिणीएकादशी
26 जनवरीसोमवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

6 मुहूर्त
1 फ़रवरीरविवारमघाद्वितीया
4 फ़रवरीबुधवारहस्तपंचमी
6 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीसप्तमी
12 फ़रवरीगुरुवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
21 फ़रवरीशनिवाररोहिणीअष्टमी
28 फ़रवरीशनिवारमघापूर्णिमा

मार्च

4 मुहूर्त
2 मार्चसोमवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
6 मार्चशुक्रवारस्वातीपंचमी
8 मार्चरविवारअनुराधासप्तमी
12 मार्चगुरुवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी

अप्रैल

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

मई

9 मुहूर्त
1 मईशुक्रवारअनुराधाद्वितीया
10 मईरविवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
11 मईसोमवाररेवतीत्रयोदशी
15 मईशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
21 मईगुरुवारमघाअष्टमी
23 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
24 मईरविवारहस्तएकादशी
28 मईगुरुवारअनुराधापूर्णिमा
30 मईशनिवारमूलद्वितीया

जून

8 मुहूर्त
7 जूनरविवाररेवतीदशमी
12 जूनशुक्रवारमृगशिराप्रतिपदा
17 जूनबुधवारमघाषष्ठी
19 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
20 जूनशनिवारहस्तअष्टमी
25 जूनगुरुवारअनुराधात्रयोदशी
27 जूनशनिवारमूलपूर्णिमा
29 जूनसोमवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

जुलाई

6 मुहूर्त
3 जुलाईशुक्रवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
4 जुलाईशनिवाररेवतीअष्टमी
8 जुलाईबुधवाररोहिणीद्वादशी
9 जुलाईगुरुवारमृगशिरात्रयोदशी
17 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
18 जुलाईशनिवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

5 मुहूर्त
18 नवंबरबुधवाररेवतीद्वादशी
22 नवंबररविवाररोहिणीद्वितीया
23 नवंबरसोमवारमृगशिरातृतीया
28 नवंबरशनिवारमघाअष्टमी
30 नवंबरसोमवारउत्तर फाल्गुनीदशमी

दिसंबर

1 मुहूर्त
3 दिसंबरगुरुवारस्वातीद्वादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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