शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1956

1956 की 45 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
19 जनवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
20 जनवरीशुक्रवाररेवतीसप्तमी
25 जनवरीबुधवारमृगशिरात्रयोदशी
29 जनवरीरविवारमघाद्वितीया

फ़रवरी

6 मुहूर्त
1 फ़रवरीबुधवारहस्तपंचमी
3 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीसप्तमी
8 फ़रवरीबुधवारमूलद्वादशी
16 फ़रवरीगुरुवाररेवतीपंचमी
26 फ़रवरीरविवारमघापूर्णिमा
27 फ़रवरीसोमवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया

मार्च

3 मुहूर्त
1 मार्चगुरुवारस्वातीपंचमी
4 मार्चरविवारअनुराधाअष्टमी
8 मार्चगुरुवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी

अप्रैल

7 मुहूर्त
15 अप्रैलरविवाररोहिणीपंचमी
20 अप्रैलशुक्रवारमघादशमी
22 अप्रैलरविवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
23 अप्रैलसोमवारहस्तत्रयोदशी
25 अप्रैलबुधवारस्वातीपूर्णिमा
27 अप्रैलशुक्रवारअनुराधाद्वितीया
30 अप्रैलसोमवारमूलपंचमी

मई

8 मुहूर्त
2 मईबुधवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
7 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
12 मईशनिवाररोहिणीद्वितीया
13 मईरविवारमृगशिरातृतीया
19 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
20 मईरविवारहस्तएकादशी
25 मईशुक्रवारअनुराधाप्रतिपदा
27 मईरविवारमूलतृतीया

जून

7 मुहूर्त
4 जूनसोमवारउत्तर भाद्रपदादशमी
9 जूनशनिवारमृगशिराप्रतिपदा
14 जूनगुरुवारमघाषष्ठी
17 जूनरविवारहस्तदशमी
21 जूनगुरुवारअनुराधात्रयोदशी
23 जूनशनिवारमूलपूर्णिमा
25 जूनसोमवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया

जुलाई

4 मुहूर्त
1 जुलाईरविवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी
6 जुलाईशुक्रवाररोहिणीत्रयोदशी
13 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
14 जुलाईशनिवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

5 मुहूर्त
15 नवंबरगुरुवाररेवतीद्वादशी
19 नवंबरसोमवाररोहिणीप्रतिपदा
25 नवंबररविवारमघाअष्टमी
28 नवंबरबुधवारहस्तएकादशी
30 नवंबरशुक्रवारस्वातीत्रयोदशी

दिसंबर

1 मुहूर्त
13 दिसंबरगुरुवाररेवतीदशमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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