शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1959

1959 की 49 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

7 मुहूर्त
15 जनवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
16 जनवरीशुक्रवाररेवतीसप्तमी
21 जनवरीबुधवाररोहिणीद्वादशी
22 जनवरीगुरुवारमृगशिरात्रयोदशी
29 जनवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
30 जनवरीशुक्रवारहस्तषष्ठी
31 जनवरीशनिवारस्वातीसप्तमी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
4 फ़रवरीबुधवारमूलद्वादशी
12 फ़रवरीगुरुवाररेवतीपंचमी
18 फ़रवरीबुधवारमृगशिरादशमी
23 फ़रवरीसोमवारमघापूर्णिमा
25 फ़रवरीबुधवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
26 फ़रवरीगुरुवारहस्ततृतीया
28 फ़रवरीशनिवारस्वातीषष्ठी

मार्च

4 मुहूर्त
2 मार्चसोमवारअनुराधाअष्टमी
5 मार्चगुरुवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी
11 मार्चबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
12 मार्चगुरुवाररेवतीतृतीया

अप्रैल

4 मुहूर्त
19 अप्रैलरविवारमघाएकादशी
25 अप्रैलशनिवारअनुराधातृतीया
27 अप्रैलसोमवारमूलपंचमी
29 अप्रैलबुधवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी

मई

7 मुहूर्त
4 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
10 मईरविवाररोहिणीद्वितीया
11 मईसोमवारमृगशिरातृतीया
16 मईशनिवारमघाअष्टमी
18 मईसोमवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
23 मईशनिवारअनुराधाप्रतिपदा
31 मईरविवारउत्तर भाद्रपदादशमी

जून

7 मुहूर्त
1 जूनसोमवारउत्तर भाद्रपदादशमी
7 जूनरविवारमृगशिराप्रतिपदा
13 जूनशनिवारमघासप्तमी
17 जूनबुधवारस्वातीएकादशी
19 जूनशुक्रवारअनुराधात्रयोदशी
21 जूनरविवारमूलप्रतिपदा
28 जूनरविवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी

जुलाई

4 मुहूर्त
3 जुलाईशुक्रवाररोहिणीत्रयोदशी
12 जुलाईरविवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
13 जुलाईसोमवारहस्तसप्तमी
15 जुलाईबुधवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

5 मुहूर्त
12 नवंबरगुरुवाररेवतीद्वादशी
18 नवंबरबुधवारमृगशिरातृतीया
23 नवंबरसोमवारमघाअष्टमी
26 नवंबरगुरुवारहस्तएकादशी
28 नवंबरशनिवारस्वातीत्रयोदशी

दिसंबर

4 मुहूर्त
2 दिसंबरबुधवारमूलद्वितीया
4 दिसंबरशुक्रवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
9 दिसंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
10 दिसंबरगुरुवाररेवतीएकादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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