शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1960

1960 की 47 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
17 जनवरीरविवारमघातृतीया
20 जनवरीबुधवारहस्तषष्ठी
22 जनवरीशुक्रवारस्वातीअष्टमी
24 जनवरीरविवारअनुराधाएकादशी

फ़रवरी

10 मुहूर्त
1 फ़रवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
7 फ़रवरीरविवाररोहिणीदशमी
8 फ़रवरीसोमवारमृगशिराएकादशी
13 फ़रवरीशनिवारमघाप्रतिपदा
15 फ़रवरीसोमवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
18 फ़रवरीगुरुवारस्वातीषष्ठी
20 फ़रवरीशनिवारअनुराधाअष्टमी
22 फ़रवरीसोमवारमूलदशमी
24 फ़रवरीबुधवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी
29 फ़रवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदातृतीया

मार्च

1 मुहूर्त
5 मार्चशनिवाररोहिणीअष्टमी

अप्रैल

4 मुहूर्त
17 अप्रैलरविवारमूलषष्ठी
18 अप्रैलसोमवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
23 अप्रैलशनिवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
29 अप्रैलशुक्रवाररोहिणीतृतीया

मई

8 मुहूर्त
7 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
8 मईरविवारहस्तद्वादशी
12 मईगुरुवारअनुराधाप्रतिपदा
16 मईसोमवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
21 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
22 मईरविवाररेवतीद्वादशी
26 मईगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
27 मईशुक्रवारमृगशिराद्वितीया

जून

6 मुहूर्त
2 जूनगुरुवारमघासप्तमी
5 जूनरविवारहस्तदशमी
10 जूनशुक्रवारमूलप्रतिपदा
12 जूनरविवारउत्तर आषाढ़ातृतीया
18 जूनशनिवाररेवतीदशमी
29 जूनबुधवारमघापंचमी

जुलाई

3 मुहूर्त
1 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
2 जुलाईशनिवारहस्तअष्टमी
4 जुलाईसोमवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

7 मुहूर्त
6 नवंबररविवाररोहिणीतृतीया
12 नवंबरशनिवारमघाअष्टमी
16 नवंबरबुधवारहस्तद्वादशी
19 नवंबरशनिवारअनुराधाप्रतिपदा
21 नवंबरसोमवारमूलतृतीया
23 नवंबरबुधवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
28 नवंबरसोमवारउत्तर भाद्रपदादशमी

दिसंबर

4 मुहूर्त
3 दिसंबरशनिवाररोहिणीपूर्णिमा
4 दिसंबररविवारमृगशिराप्रतिपदा
10 दिसंबरशनिवारमघासप्तमी
15 दिसंबरगुरुवारस्वातीद्वादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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