शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1952

1952 की 45 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
18 जनवरीशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
19 जनवरीशनिवारहस्तसप्तमी
23 जनवरीबुधवारअनुराधाएकादशी
31 जनवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदापंचमी

फ़रवरी

8 मुहूर्त
1 फ़रवरीशुक्रवाररेवतीषष्ठी
6 फ़रवरीबुधवारमृगशिराएकादशी
14 फ़रवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
17 फ़रवरीरविवारस्वातीषष्ठी
21 फ़रवरीगुरुवारमूलदशमी
23 फ़रवरीशनिवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
27 फ़रवरीबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
28 फ़रवरीगुरुवाररेवतीतृतीया

मार्च

3 मुहूर्त
3 मार्चसोमवाररोहिणीसप्तमी
12 मार्चबुधवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
13 मार्चगुरुवारहस्तद्वितीया

अप्रैल

2 मुहूर्त
17 अप्रैलगुरुवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
27 अप्रैलरविवाररोहिणीतृतीया

मई

10 मुहूर्त
4 मईरविवारमघादशमी
7 मईबुधवारहस्तत्रयोदशी
9 मईशुक्रवारस्वातीपूर्णिमा
11 मईरविवारअनुराधाद्वितीया
15 मईगुरुवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
19 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
24 मईशनिवाररोहिणीप्रतिपदा
25 मईरविवारमृगशिराद्वितीया
26 मईसोमवारमृगशिरातृतीया
31 मईशनिवारमघासप्तमी

जून

4 मुहूर्त
5 जूनगुरुवारस्वातीद्वादशी
9 जूनसोमवारमूलप्रतिपदा
27 जूनशुक्रवारमघापंचमी
30 जूनसोमवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी

जुलाई

1 मुहूर्त
3 जुलाईगुरुवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

2 मुहूर्त
30 अक्टूबरगुरुवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
31 अक्टूबरशुक्रवाररेवतीत्रयोदशी

नवंबर

6 मुहूर्त
13 नवंबरगुरुवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
14 नवंबरशुक्रवारहस्तद्वादशी
20 नवंबरगुरुवारमूलतृतीया
22 नवंबरशनिवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
27 नवंबरगुरुवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
28 नवंबरशुक्रवाररेवतीद्वादशी

दिसंबर

5 मुहूर्त
3 दिसंबरबुधवारमृगशिराद्वितीया
8 दिसंबरसोमवारमघासप्तमी
10 दिसंबरबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
13 दिसंबरशनिवारस्वातीएकादशी
15 दिसंबरसोमवारअनुराधात्रयोदशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

अन्य वर्ष