शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2015

2015 की 47 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
15 जनवरीगुरुवारस्वातीदशमी
17 जनवरीशनिवारअनुराधाद्वादशी
25 जनवरीरविवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
26 जनवरीसोमवाररेवतीसप्तमी
30 जनवरीशुक्रवाररोहिणीएकादशी
31 जनवरीशनिवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
5 फ़रवरीगुरुवारमघाप्रतिपदा
7 फ़रवरीशनिवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
9 फ़रवरीसोमवारहस्तपंचमी
11 फ़रवरीबुधवारस्वातीसप्तमी
15 फ़रवरीरविवारमूलएकादशी
21 फ़रवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
26 फ़रवरीगुरुवाररोहिणीअष्टमी

मार्च

5 मुहूर्त
5 मार्चगुरुवारमघापूर्णिमा
7 मार्चशनिवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
8 मार्चरविवारहस्ततृतीया
12 मार्चगुरुवारअनुराधाषष्ठी
14 मार्चशनिवारमूलअष्टमी

अप्रैल

3 मुहूर्त
17 अप्रैलशुक्रवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
23 अप्रैलगुरुवारमृगशिरापंचमी
30 अप्रैलगुरुवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी

मई

11 मुहूर्त
1 मईशुक्रवारहस्तत्रयोदशी
2 मईशनिवारहस्तत्रयोदशी
4 मईसोमवारस्वातीपूर्णिमा
6 मईबुधवारअनुराधाद्वितीया
10 मईरविवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
15 मईशुक्रवाररेवतीद्वादशी
20 मईबुधवारमृगशिराद्वितीया
25 मईसोमवारमघासप्तमी
28 मईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
29 मईशुक्रवारहस्तएकादशी
31 मईरविवारस्वातीत्रयोदशी

जून

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

जुलाई

7 मुहूर्त
3 जुलाईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
8 जुलाईबुधवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
9 जुलाईगुरुवाररेवतीअष्टमी
13 जुलाईसोमवाररोहिणीद्वादशी
19 जुलाईरविवारमघातृतीया
22 जुलाईबुधवारहस्तषष्ठी
23 जुलाईगुरुवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

3 मुहूर्त
23 नवंबरसोमवाररेवतीद्वादशी
26 नवंबरगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
27 नवंबरशुक्रवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

5 मुहूर्त
2 दिसंबरबुधवारमघासप्तमी
5 दिसंबरशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
6 दिसंबररविवारहस्तदशमी
12 दिसंबरशनिवारमूलप्रतिपदा
14 दिसंबरसोमवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

अन्य वर्ष