शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2012

2012 की 45 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
15 जनवरीरविवारहस्तसप्तमी
19 जनवरीगुरुवारअनुराधाएकादशी
21 जनवरीशनिवारमूलत्रयोदशी
28 जनवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
29 जनवरीरविवाररेवतीषष्ठी

फ़रवरी

9 मुहूर्त
3 फ़रवरीशुक्रवाररोहिणीएकादशी
4 फ़रवरीशनिवारमृगशिराद्वादशी
9 फ़रवरीगुरुवारमघाद्वितीया
13 फ़रवरीसोमवारस्वातीषष्ठी
15 फ़रवरीबुधवारअनुराधाअष्टमी
17 फ़रवरीशुक्रवारमूलदशमी
19 फ़रवरीरविवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
24 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
25 फ़रवरीशनिवाररेवतीतृतीया

मार्च

5 मुहूर्त
1 मार्चगुरुवाररोहिणीअष्टमी
9 मार्चशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
10 मार्चशनिवारहस्तद्वितीया
12 मार्चसोमवारस्वातीपंचमी
14 मार्चबुधवारअनुराधासप्तमी

अप्रैल

2 मुहूर्त
19 अप्रैलगुरुवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
26 अप्रैलगुरुवारमृगशिरापंचमी

मई

10 मुहूर्त
3 मईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
4 मईशुक्रवारहस्तत्रयोदशी
6 मईरविवारस्वातीपूर्णिमा
7 मईसोमवारअनुराधाप्रतिपदा
11 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
16 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
17 मईगुरुवाररेवतीद्वादशी
23 मईबुधवारमृगशिराद्वितीया
28 मईसोमवारमघासप्तमी
31 मईगुरुवारहस्तदशमी

जून

8 मुहूर्त
2 जूनशनिवारस्वातीत्रयोदशी
4 जूनसोमवारअनुराधापूर्णिमा
6 जूनबुधवारमूलद्वितीया
7 जूनगुरुवारउत्तर आषाढ़ातृतीया
14 जूनगुरुवाररेवतीदशमी
25 जूनसोमवारमघाषष्ठी
27 जूनबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
29 जूनशुक्रवारस्वातीदशमी

जुलाई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

2 मुहूर्त
29 नवंबरगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
30 नवंबरशुक्रवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

4 मुहूर्त
5 दिसंबरबुधवारमघाषष्ठी
6 दिसंबरगुरुवारमघासप्तमी
10 दिसंबरसोमवारस्वातीद्वादशी
14 दिसंबरशुक्रवारमूलप्रतिपदा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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