जनवरी
4 मुहूर्त| 16 जनवरी | शनिवार | उत्तर आषाढ़ा | प्रतिपदा |
| 21 जनवरी | गुरुवार | उत्तर भाद्रपदा | षष्ठी |
| 22 जनवरी | शुक्रवार | रेवती | सप्तमी |
| 27 जनवरी | बुधवार | मृगशिरा | द्वादशी |
फ़रवरी
5 मुहूर्त| 3 फ़रवरी | बुधवार | हस्त | पंचमी |
| 5 फ़रवरी | शुक्रवार | स्वाती | सप्तमी |
| 10 फ़रवरी | बुधवार | मूल | द्वादशी |
| 17 फ़रवरी | बुधवार | उत्तर भाद्रपदा | तृतीया |
| 28 फ़रवरी | रविवार | मघा | पूर्णिमा |
मार्च
4 मुहूर्त| 3 मार्च | बुधवार | हस्त | तृतीया |
| 5 मार्च | शुक्रवार | स्वाती | पंचमी |
| 7 मार्च | रविवार | अनुराधा | सप्तमी |
| 11 मार्च | गुरुवार | उत्तर आषाढ़ा | एकादशी |
अप्रैल
1 मुहूर्त| 30 अप्रैल | शुक्रवार | अनुराधा | द्वितीया |
मई
11 मुहूर्त| 3 मई | सोमवार | मूल | पंचमी |
| 5 मई | बुधवार | उत्तर आषाढ़ा | सप्तमी |
| 10 मई | सोमवार | उत्तर भाद्रपदा | एकादशी |
| 15 मई | शनिवार | रोहिणी | प्रतिपदा |
| 16 मई | रविवार | मृगशिरा | तृतीया |
| 21 मई | शुक्रवार | मघा | अष्टमी |
| 23 मई | रविवार | उत्तर फाल्गुनी | दशमी |
| 24 मई | सोमवार | हस्त | एकादशी |
| 26 मई | बुधवार | स्वाती | त्रयोदशी |
| 28 मई | शुक्रवार | अनुराधा | प्रतिपदा |
| 30 मई | रविवार | मूल | तृतीया |
जून
7 मुहूर्त| 7 जून | सोमवार | उत्तर भाद्रपदा | दशमी |
| 13 जून | रविवार | मृगशिरा | प्रतिपदा |
| 17 जून | गुरुवार | मघा | षष्ठी |
| 19 जून | शनिवार | उत्तर फाल्गुनी | अष्टमी |
| 24 जून | गुरुवार | अनुराधा | त्रयोदशी |
| 26 जून | शनिवार | मूल | पूर्णिमा |
| 28 जून | सोमवार | उत्तर आषाढ़ा | द्वितीया |
जुलाई
6 मुहूर्त| 4 जुलाई | रविवार | उत्तर भाद्रपदा | सप्तमी |
| 5 जुलाई | सोमवार | रेवती | अष्टमी |
| 9 जुलाई | शुक्रवार | रोहिणी | द्वादशी |
| 10 जुलाई | शनिवार | मृगशिरा | त्रयोदशी |
| 16 जुलाई | शुक्रवार | उत्तर फाल्गुनी | पंचमी |
| 17 जुलाई | शनिवार | हस्त | षष्ठी |
अगस्त
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
सितंबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
अक्टूबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं
- सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
- तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
- वार मंगलवार न हो।
- दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
- सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।
प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।