शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2010

2010 की 44 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
16 जनवरीशनिवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
21 जनवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
22 जनवरीशुक्रवाररेवतीसप्तमी
27 जनवरीबुधवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

5 मुहूर्त
3 फ़रवरीबुधवारहस्तपंचमी
5 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीसप्तमी
10 फ़रवरीबुधवारमूलद्वादशी
17 फ़रवरीबुधवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
28 फ़रवरीरविवारमघापूर्णिमा

मार्च

4 मुहूर्त
3 मार्चबुधवारहस्ततृतीया
5 मार्चशुक्रवारस्वातीपंचमी
7 मार्चरविवारअनुराधासप्तमी
11 मार्चगुरुवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी

अप्रैल

1 मुहूर्त
30 अप्रैलशुक्रवारअनुराधाद्वितीया

मई

11 मुहूर्त
3 मईसोमवारमूलपंचमी
5 मईबुधवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
10 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
15 मईशनिवाररोहिणीप्रतिपदा
16 मईरविवारमृगशिरातृतीया
21 मईशुक्रवारमघाअष्टमी
23 मईरविवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
24 मईसोमवारहस्तएकादशी
26 मईबुधवारस्वातीत्रयोदशी
28 मईशुक्रवारअनुराधाप्रतिपदा
30 मईरविवारमूलतृतीया

जून

7 मुहूर्त
7 जूनसोमवारउत्तर भाद्रपदादशमी
13 जूनरविवारमृगशिराप्रतिपदा
17 जूनगुरुवारमघाषष्ठी
19 जूनशनिवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
24 जूनगुरुवारअनुराधात्रयोदशी
26 जूनशनिवारमूलपूर्णिमा
28 जूनसोमवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया

जुलाई

6 मुहूर्त
4 जुलाईरविवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
5 जुलाईसोमवाररेवतीअष्टमी
9 जुलाईशुक्रवाररोहिणीद्वादशी
10 जुलाईशनिवारमृगशिरात्रयोदशी
16 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
17 जुलाईशनिवारहस्तषष्ठी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

3 मुहूर्त
18 नवंबरगुरुवाररेवतीद्वादशी
24 नवंबरबुधवारमृगशिरातृतीया
28 नवंबररविवारमघासप्तमी

दिसंबर

3 मुहूर्त
1 दिसंबरबुधवारहस्तदशमी
3 दिसंबरशुक्रवारस्वातीत्रयोदशी
16 दिसंबरगुरुवाररेवतीदशमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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