शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2007

2007 की 42 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
15 जनवरीसोमवारअनुराधाएकादशी
17 जनवरीबुधवारमूलत्रयोदशी
24 जनवरीबुधवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
25 जनवरीगुरुवाररेवतीसप्तमी
28 जनवरीरविवाररोहिणीदशमी
29 जनवरीसोमवारमृगशिराएकादशी

फ़रवरी

5 मुहूर्त
4 फ़रवरीरविवारमघाद्वितीया
7 फ़रवरीबुधवारहस्तपंचमी
9 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीसप्तमी
15 फ़रवरीगुरुवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
26 फ़रवरीसोमवारमृगशिरादशमी

मार्च

4 मुहूर्त
3 मार्चशनिवारमघापूर्णिमा
5 मार्चसोमवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
9 मार्चशुक्रवारस्वातीपंचमी
11 मार्चरविवारअनुराधासप्तमी

अप्रैल

6 मुहूर्त
20 अप्रैलशुक्रवाररोहिणीतृतीया
21 अप्रैलशनिवारमृगशिरापंचमी
26 अप्रैलगुरुवारमघादशमी
27 अप्रैलशुक्रवारमघाएकादशी
29 अप्रैलरविवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
30 अप्रैलसोमवारहस्तत्रयोदशी

मई

1 मुहूर्त
2 मईबुधवारस्वातीपूर्णिमा

जून

8 मुहूर्त
3 जूनरविवारमूलद्वितीया
10 जूनरविवारउत्तर भाद्रपदादशमी
11 जूनसोमवाररेवतीएकादशी
20 जूनबुधवारमघाषष्ठी
22 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
23 जूनशनिवारहस्तअष्टमी
28 जूनगुरुवारअनुराधात्रयोदशी
30 जूनशनिवारमूलपूर्णिमा

जुलाई

7 मुहूर्त
2 जुलाईसोमवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया
7 जुलाईशनिवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
8 जुलाईरविवाररेवतीअष्टमी
12 जुलाईगुरुवाररोहिणीत्रयोदशी
20 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
21 जुलाईशनिवारहस्तसप्तमी
25 जुलाईबुधवारअनुराधादशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

3 मुहूर्त
22 नवंबरगुरुवाररेवतीद्वादशी
25 नवंबररविवाररोहिणीप्रतिपदा
26 नवंबरसोमवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

2 मुहूर्त
1 दिसंबरशनिवारमघाअष्टमी
6 दिसंबरगुरुवारस्वातीद्वादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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