शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2004

2004 की 43 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

3 मुहूर्त
18 जनवरीरविवारअनुराधाएकादशी
22 जनवरीगुरुवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
26 जनवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदापंचमी

फ़रवरी

9 मुहूर्त
1 फ़रवरीरविवाररोहिणीएकादशी
2 फ़रवरीसोमवारमृगशिराएकादशी
7 फ़रवरीशनिवारमघाप्रतिपदा
9 फ़रवरीसोमवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
12 फ़रवरीगुरुवारस्वातीषष्ठी
16 फ़रवरीसोमवारमूलएकादशी
18 फ़रवरीबुधवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
23 फ़रवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
28 फ़रवरीशनिवाररोहिणीअष्टमी

मार्च

5 मुहूर्त
6 मार्चशनिवारमघापूर्णिमा
8 मार्चसोमवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
11 मार्चगुरुवारस्वातीपंचमी
12 मार्चशुक्रवारअनुराधाषष्ठी
14 मार्चरविवारमूलअष्टमी

अप्रैल

3 मुहूर्त
17 अप्रैलशनिवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
24 अप्रैलशनिवारमृगशिरापंचमी
30 अप्रैलशुक्रवारमघादशमी

मई

10 मुहूर्त
2 मईरविवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
6 मईगुरुवारअनुराधाद्वितीया
10 मईसोमवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
15 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
16 मईरविवाररेवतीत्रयोदशी
20 मईगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
21 मईशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
27 मईगुरुवारमघाअष्टमी
29 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
30 मईरविवारहस्तएकादशी

जून

8 मुहूर्त
3 जूनगुरुवारअनुराधापूर्णिमा
4 जूनशुक्रवारमूलप्रतिपदा
12 जूनशनिवाररेवतीदशमी
18 जूनशुक्रवारमृगशिराप्रतिपदा
23 जूनबुधवारमघापंचमी
25 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
26 जूनशनिवारहस्तअष्टमी
28 जूनसोमवारस्वातीदशमी

जुलाई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

2 मुहूर्त
27 नवंबरशनिवाररोहिणीप्रतिपदा
28 नवंबररविवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

3 मुहूर्त
4 दिसंबरशनिवारमघासप्तमी
9 दिसंबरगुरुवारस्वातीद्वादशी
13 दिसंबरसोमवारमूलद्वितीया

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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