शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2002

2002 की 50 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
19 जनवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
20 जनवरीरविवाररेवतीषष्ठी
21 जनवरीसोमवाररेवतीसप्तमी
25 जनवरीशुक्रवाररोहिणीएकादशी
26 जनवरीशनिवारमृगशिराद्वादशी
30 जनवरीबुधवारमघाद्वितीया

फ़रवरी

8 मुहूर्त
2 फ़रवरीशनिवारहस्तपंचमी
4 फ़रवरीसोमवारस्वातीसप्तमी
6 फ़रवरीबुधवारअनुराधादशमी
8 फ़रवरीशुक्रवारमूलएकादशी
10 फ़रवरीरविवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
17 फ़रवरीरविवाररेवतीपंचमी
22 फ़रवरीशुक्रवारमृगशिरादशमी
27 फ़रवरीबुधवारमघापूर्णिमा

मार्च

3 मुहूर्त
1 मार्चशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
3 मार्चरविवारस्वातीपंचमी
9 मार्चशनिवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी

अप्रैल

4 मुहूर्त
18 अप्रैलगुरुवारमृगशिरापंचमी
25 अप्रैलगुरुवारहस्तत्रयोदशी
27 अप्रैलशनिवारस्वातीपूर्णिमा
29 अप्रैलसोमवारअनुराधातृतीया

मई

10 मुहूर्त
1 मईबुधवारमूलपंचमी
3 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
8 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
9 मईगुरुवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
10 मईशुक्रवाररेवतीत्रयोदशी
15 मईबुधवारमृगशिरातृतीया
20 मईसोमवारमघाअष्टमी
22 मईबुधवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
23 मईगुरुवारहस्तद्वादशी
26 मईरविवारअनुराधापूर्णिमा

जून

6 मुहूर्त
5 जूनबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
6 जूनगुरुवाररेवतीएकादशी
16 जूनरविवारमघाषष्ठी
21 जूनशुक्रवारस्वातीएकादशी
23 जूनरविवारअनुराधात्रयोदशी
27 जूनगुरुवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

जुलाई

4 मुहूर्त
3 जुलाईबुधवाररेवतीअष्टमी
8 जुलाईसोमवाररोहिणीत्रयोदशी
13 जुलाईशनिवारमघातृतीया
15 जुलाईसोमवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

6 मुहूर्त
16 नवंबरशनिवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
17 नवंबररविवाररेवतीत्रयोदशी
21 नवंबरगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
22 नवंबरशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
27 नवंबरबुधवारमघासप्तमी
30 नवंबरशनिवारहस्तएकादशी

दिसंबर

3 मुहूर्त
2 दिसंबरसोमवारस्वातीत्रयोदशी
6 दिसंबरशुक्रवारमूलद्वितीया
14 दिसंबरशनिवाररेवतीदशमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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