शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2000

2000 की 46 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
19 जनवरीबुधवारमृगशिरात्रयोदशी
23 जनवरीरविवारमघातृतीया
26 जनवरीबुधवारहस्तषष्ठी
28 जनवरीशुक्रवारस्वातीअष्टमी
30 जनवरीरविवारअनुराधादशमी
31 जनवरीसोमवारअनुराधादशमी

फ़रवरी

5 मुहूर्त
2 फ़रवरीबुधवारमूलद्वादशी
10 फ़रवरीगुरुवाररेवतीपंचमी
20 फ़रवरीरविवारमघाप्रतिपदा
25 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीषष्ठी
27 फ़रवरीरविवारअनुराधाअष्टमी

मार्च

5 मुहूर्त
2 मार्चगुरुवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी
8 मार्चबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
9 मार्चगुरुवाररेवतीतृतीया
12 मार्चरविवाररोहिणीसप्तमी
13 मार्चसोमवारमृगशिराअष्टमी

अप्रैल

6 मुहूर्त
14 अप्रैलशुक्रवारमघाएकादशी
16 अप्रैलरविवारउत्तर फाल्गुनीत्रयोदशी
19 अप्रैलबुधवारस्वातीप्रतिपदा
21 अप्रैलशुक्रवारअनुराधातृतीया
24 अप्रैलसोमवारमूलपंचमी
26 अप्रैलबुधवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी

मई

7 मुहूर्त
1 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
6 मईशनिवाररोहिणीतृतीया
14 मईरविवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
15 मईसोमवारहस्तद्वादशी
19 मईशुक्रवारअनुराधाप्रतिपदा
21 मईरविवारमूलतृतीया
29 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदादशमी

जून

6 मुहूर्त
3 जूनशनिवारमृगशिराप्रतिपदा
8 जूनगुरुवारमघासप्तमी
11 जूनरविवारहस्तदशमी
17 जूनशनिवारमूलप्रतिपदा
25 जूनरविवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी
30 जूनशुक्रवाररोहिणीत्रयोदशी

जुलाई

2 मुहूर्त
7 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
8 जुलाईशनिवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

6 मुहूर्त
8 नवंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
9 नवंबरगुरुवाररेवतीद्वादशी
13 नवंबरसोमवाररोहिणीद्वितीया
19 नवंबररविवारमघाअष्टमी
22 नवंबरबुधवारहस्तद्वादशी
26 नवंबररविवारअनुराधाप्रतिपदा

दिसंबर

3 मुहूर्त
6 दिसंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
7 दिसंबरगुरुवाररेवतीएकादशी
11 दिसंबरसोमवाररोहिणीपूर्णिमा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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