शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2036

2036 की 51 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
18 जनवरीशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
19 जनवरीशनिवारहस्तसप्तमी
23 जनवरीबुधवारअनुराधाएकादशी
25 जनवरीशुक्रवारमूलद्वादशी

फ़रवरी

10 मुहूर्त
2 फ़रवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
3 फ़रवरीरविवाररेवतीषष्ठी
7 फ़रवरीगुरुवाररोहिणीदशमी
8 फ़रवरीशुक्रवारमृगशिराएकादशी
14 फ़रवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
17 फ़रवरीरविवारस्वातीषष्ठी
21 फ़रवरीगुरुवारमूलदशमी
22 फ़रवरीशुक्रवारमूलएकादशी
24 फ़रवरीरविवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
29 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया

मार्च

5 मुहूर्त
1 मार्चशनिवाररेवतीतृतीया
5 मार्चबुधवाररोहिणीसप्तमी
6 मार्चगुरुवारमृगशिराअष्टमी
13 मार्चगुरुवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
14 मार्चशुक्रवारहस्तद्वितीया

अप्रैल

4 मुहूर्त
16 अप्रैलबुधवारमूलषष्ठी
18 अप्रैलशुक्रवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
19 अप्रैलशनिवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
24 अप्रैलगुरुवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी

मई

6 मुहूर्त
7 मईबुधवारहस्तद्वादशी
11 मईरविवारअनुराधाप्रतिपदा
16 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
21 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
22 मईगुरुवाररेवतीएकादशी
26 मईसोमवाररोहिणीप्रतिपदा

जून

8 मुहूर्त
1 जूनरविवारमघासप्तमी
4 जूनबुधवारहस्तएकादशी
6 जूनशुक्रवारस्वातीत्रयोदशी
8 जूनरविवारअनुराधापूर्णिमा
12 जूनगुरुवारउत्तर आषाढ़ातृतीया
19 जूनगुरुवाररेवतीदशमी
28 जूनशनिवारमघापंचमी
30 जूनसोमवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी

जुलाई

1 मुहूर्त
3 जुलाईगुरुवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

10 मुहूर्त
1 नवंबरशनिवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
2 नवंबररविवाररेवतीत्रयोदशी
6 नवंबरगुरुवाररोहिणीतृतीया
14 नवंबरशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
15 नवंबरशनिवारहस्तद्वादशी
19 नवंबरबुधवारअनुराधाद्वितीया
23 नवंबररविवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
28 नवंबरशुक्रवारउत्तर भाद्रपदादशमी
29 नवंबरशनिवाररेवतीएकादशी
30 नवंबररविवाररेवतीद्वादशी

दिसंबर

3 मुहूर्त
4 दिसंबरगुरुवारमृगशिराप्रतिपदा
12 दिसंबरशुक्रवारहस्तदशमी
14 दिसंबररविवारस्वातीद्वादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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