शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2040

2040 की 50 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
19 जनवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
20 जनवरीशुक्रवाररेवतीसप्तमी
25 जनवरीबुधवारमृगशिराद्वादशी
26 जनवरीगुरुवारमृगशिरात्रयोदशी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
3 फ़रवरीशुक्रवारहस्तपंचमी
5 फ़रवरीरविवारस्वातीसप्तमी
9 फ़रवरीगुरुवारमूलएकादशी
15 फ़रवरीबुधवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
22 फ़रवरीबुधवारमृगशिरादशमी
27 फ़रवरीसोमवारमघापूर्णिमा
29 फ़रवरीबुधवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा

मार्च

5 मुहूर्त
1 मार्चगुरुवारहस्तद्वितीया
3 मार्चशनिवारस्वातीपंचमी
5 मार्चसोमवारअनुराधासप्तमी
9 मार्चशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी
14 मार्चबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया

अप्रैल

5 मुहूर्त
16 अप्रैलसोमवाररोहिणीपंचमी
22 अप्रैलरविवारमघादशमी
25 अप्रैलबुधवारहस्तत्रयोदशी
27 अप्रैलशुक्रवारस्वातीपूर्णिमा
29 अप्रैलरविवारअनुराधातृतीया

मई

9 मुहूर्त
3 मईगुरुवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
9 मईबुधवाररेवतीत्रयोदशी
13 मईरविवाररोहिणीद्वितीया
14 मईसोमवारमृगशिरातृतीया
19 मईशनिवारमघाअष्टमी
23 मईबुधवारहस्तद्वादशी
26 मईशनिवारअनुराधापूर्णिमा
28 मईसोमवारमूलद्वितीया
30 मईबुधवारउत्तर आषाढ़ापंचमी

जून

7 मुहूर्त
4 जूनसोमवारउत्तर भाद्रपदादशमी
10 जूनरविवारमृगशिराप्रतिपदा
16 जूनशनिवारमघाषष्ठी
18 जूनसोमवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
21 जूनगुरुवारस्वातीएकादशी
23 जूनशनिवारअनुराधात्रयोदशी
25 जूनसोमवारमूलप्रतिपदा

जुलाई

5 मुहूर्त
1 जुलाईरविवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी
6 जुलाईशुक्रवाररोहिणीद्वादशी
7 जुलाईशनिवारमृगशिरात्रयोदशी
15 जुलाईरविवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
16 जुलाईसोमवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

6 मुहूर्त
15 नवंबरगुरुवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
16 नवंबरशुक्रवाररेवतीत्रयोदशी
21 नवंबरबुधवारमृगशिरातृतीया
26 नवंबरसोमवारमघासप्तमी
29 नवंबरगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
30 नवंबरशुक्रवारहस्तएकादशी

दिसंबर

2 मुहूर्त
2 दिसंबररविवारस्वातीत्रयोदशी
13 दिसंबरगुरुवाररेवतीदशमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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