शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2044

2044 की 51 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
17 जनवरीरविवारमघातृतीया
20 जनवरीबुधवारहस्तषष्ठी
22 जनवरीशुक्रवारस्वातीअष्टमी
25 जनवरीसोमवारअनुराधाएकादशी
27 जनवरीबुधवारमूलत्रयोदशी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
4 फ़रवरीगुरुवाररेवतीपंचमी
8 फ़रवरीसोमवाररोहिणीदशमी
14 फ़रवरीरविवारमघाप्रतिपदा
19 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीषष्ठी
21 फ़रवरीरविवारअनुराधाअष्टमी
25 फ़रवरीगुरुवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी
26 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी

मार्च

4 मुहूर्त
2 मार्चबुधवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
6 मार्चरविवाररोहिणीसप्तमी
7 मार्चसोमवारमृगशिराअष्टमी
14 मार्चसोमवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा

अप्रैल

5 मुहूर्त
14 अप्रैलगुरुवारस्वातीद्वितीया
18 अप्रैलसोमवारमूलषष्ठी
20 अप्रैलबुधवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
25 अप्रैलसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
30 अप्रैलशनिवाररोहिणीतृतीया

मई

9 मुहूर्त
6 मईशुक्रवारमघादशमी
8 मईरविवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
9 मईसोमवारहस्तत्रयोदशी
11 मईबुधवारस्वातीपूर्णिमा
13 मईशुक्रवारअनुराधाप्रतिपदा
15 मईरविवारमूलतृतीया
18 मईबुधवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
23 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
28 मईशनिवारमृगशिराप्रतिपदा

जून

6 मुहूर्त
2 जूनगुरुवारमघासप्तमी
5 जूनरविवारहस्तदशमी
11 जूनशनिवारमूलप्रतिपदा
12 जूनरविवारमूलद्वितीया
19 जूनरविवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी
29 जूनबुधवारमघापंचमी

जुलाई

3 मुहूर्त
1 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
2 जुलाईशनिवारहस्तअष्टमी
4 जुलाईसोमवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

7 मुहूर्त
3 नवंबरगुरुवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
7 नवंबरसोमवाररोहिणीद्वितीया
16 नवंबरबुधवारहस्तद्वादशी
20 नवंबररविवारअनुराधाप्रतिपदा
24 नवंबरगुरुवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
25 नवंबरशुक्रवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
30 नवंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी

दिसंबर

5 मुहूर्त
1 दिसंबरगुरुवाररेवतीएकादशी
5 दिसंबरसोमवाररोहिणीप्रतिपदा
10 दिसंबरशनिवारमघाषष्ठी
12 दिसंबरसोमवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
15 दिसंबरगुरुवारस्वातीएकादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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