शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2047

2047 की 46 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
17 जनवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
18 जनवरीशुक्रवारहस्तसप्तमी
21 जनवरीसोमवारअनुराधादशमी
23 जनवरीबुधवारमूलद्वादशी
31 जनवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदापंचमी

फ़रवरी

8 मुहूर्त
1 फ़रवरीशुक्रवाररेवतीषष्ठी
6 फ़रवरीबुधवारमृगशिराएकादशी
11 फ़रवरीसोमवारमघाप्रतिपदा
13 फ़रवरीबुधवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
16 फ़रवरीशनिवारस्वातीसप्तमी
20 फ़रवरीबुधवारमूलएकादशी
22 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
27 फ़रवरीबुधवारउत्तर भाद्रपदातृतीया

मार्च

1 मुहूर्त
13 मार्चबुधवारहस्तद्वितीया

अप्रैल

3 मुहूर्त
15 अप्रैलसोमवारमूलषष्ठी
17 अप्रैलबुधवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
28 अप्रैलरविवाररोहिणीतृतीया

मई

8 मुहूर्त
6 मईसोमवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
9 मईगुरुवारस्वातीपूर्णिमा
11 मईशनिवारअनुराधाद्वितीया
15 मईबुधवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
20 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
25 मईशनिवाररोहिणीप्रतिपदा
26 मईरविवाररोहिणीद्वितीया
27 मईसोमवारमृगशिराद्वितीया

जून

6 मुहूर्त
1 जूनशनिवारमघासप्तमी
3 जूनसोमवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
9 जूनरविवारमूलद्वितीया
17 जूनसोमवाररेवतीदशमी
28 जूनशुक्रवारमघापंचमी
30 जूनरविवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी

जुलाई

1 मुहूर्त
1 जुलाईसोमवारहस्तअष्टमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

1 मुहूर्त
31 अक्टूबरगुरुवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी

नवंबर

8 मुहूर्त
6 नवंबरबुधवारमृगशिरातृतीया
14 नवंबरगुरुवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
15 नवंबरशुक्रवारहस्तत्रयोदशी
18 नवंबरसोमवारअनुराधाप्रतिपदा
20 नवंबरबुधवारमूलतृतीया
22 नवंबरशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
27 नवंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
28 नवंबरगुरुवाररेवतीएकादशी

दिसंबर

5 मुहूर्त
2 दिसंबरसोमवाररोहिणीपूर्णिमा
4 दिसंबरबुधवारमृगशिराद्वितीया
9 दिसंबरसोमवारमघासप्तमी
12 दिसंबरगुरुवारहस्तदशमी
14 दिसंबरशनिवारस्वातीद्वादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

अन्य वर्ष