जनवरी
4 मुहूर्त| 16 जनवरी | गुरुवार | उत्तर आषाढ़ा | प्रतिपदा |
| 22 जनवरी | बुधवार | रेवती | सप्तमी |
| 26 जनवरी | रविवार | रोहिणी | एकादशी |
| 27 जनवरी | सोमवार | मृगशिरा | द्वादशी |
फ़रवरी
7 मुहूर्त| 2 फ़रवरी | रविवार | मघा | तृतीया |
| 6 फ़रवरी | गुरुवार | स्वाती | सप्तमी |
| 10 फ़रवरी | सोमवार | मूल | एकादशी |
| 12 फ़रवरी | बुधवार | उत्तर आषाढ़ा | त्रयोदशी |
| 22 फ़रवरी | शनिवार | रोहिणी | अष्टमी |
| 24 फ़रवरी | सोमवार | मृगशिरा | दशमी |
| 29 फ़रवरी | शनिवार | मघा | पूर्णिमा |
मार्च
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
अप्रैल
4 मुहूर्त| 18 अप्रैल | शनिवार | मृगशिरा | पंचमी |
| 24 अप्रैल | शुक्रवार | मघा | एकादशी |
| 26 अप्रैल | रविवार | उत्तर फाल्गुनी | त्रयोदशी |
| 30 अप्रैल | गुरुवार | अनुराधा | द्वितीया |
मई
12 मुहूर्त| 2 मई | शनिवार | मूल | पंचमी |
| 4 मई | सोमवार | उत्तर आषाढ़ा | सप्तमी |
| 9 मई | शनिवार | उत्तर भाद्रपदा | द्वादशी |
| 10 मई | रविवार | रेवती | त्रयोदशी |
| 14 मई | गुरुवार | रोहिणी | द्वितीया |
| 15 मई | शुक्रवार | रोहिणी | द्वितीया |
| 16 मई | शनिवार | मृगशिरा | तृतीया |
| 21 मई | गुरुवार | मघा | अष्टमी |
| 23 मई | शनिवार | उत्तर फाल्गुनी | दशमी |
| 24 मई | रविवार | हस्त | एकादशी |
| 28 मई | गुरुवार | अनुराधा | प्रतिपदा |
| 29 मई | शुक्रवार | मूल | द्वितीया |
जून
8 मुहूर्त| 6 जून | शनिवार | रेवती | दशमी |
| 12 जून | शुक्रवार | मृगशिरा | प्रतिपदा |
| 17 जून | बुधवार | मघा | षष्ठी |
| 19 जून | शुक्रवार | उत्तर फाल्गुनी | अष्टमी |
| 22 जून | सोमवार | स्वाती | एकादशी |
| 24 जून | बुधवार | अनुराधा | त्रयोदशी |
| 26 जून | शुक्रवार | मूल | पूर्णिमा |
| 28 जून | रविवार | उत्तर आषाढ़ा | तृतीया |
जुलाई
5 मुहूर्त| 2 जुलाई | गुरुवार | उत्तर भाद्रपदा | सप्तमी |
| 3 जुलाई | शुक्रवार | रेवती | अष्टमी |
| 8 जुलाई | बुधवार | रोहिणी | त्रयोदशी |
| 17 जुलाई | शुक्रवार | उत्तर फाल्गुनी | षष्ठी |
| 18 जुलाई | शनिवार | हस्त | सप्तमी |
अगस्त
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
सितंबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
अक्टूबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं
- सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
- तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
- वार मंगलवार न हो।
- दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
- सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।
प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।