शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2048

2048 की 47 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
16 जनवरीगुरुवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
22 जनवरीबुधवाररेवतीसप्तमी
26 जनवरीरविवाररोहिणीएकादशी
27 जनवरीसोमवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
2 फ़रवरीरविवारमघातृतीया
6 फ़रवरीगुरुवारस्वातीसप्तमी
10 फ़रवरीसोमवारमूलएकादशी
12 फ़रवरीबुधवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
22 फ़रवरीशनिवाररोहिणीअष्टमी
24 फ़रवरीसोमवारमृगशिरादशमी
29 फ़रवरीशनिवारमघापूर्णिमा

मार्च

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अप्रैल

4 मुहूर्त
18 अप्रैलशनिवारमृगशिरापंचमी
24 अप्रैलशुक्रवारमघाएकादशी
26 अप्रैलरविवारउत्तर फाल्गुनीत्रयोदशी
30 अप्रैलगुरुवारअनुराधाद्वितीया

मई

12 मुहूर्त
2 मईशनिवारमूलपंचमी
4 मईसोमवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
9 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
10 मईरविवाररेवतीत्रयोदशी
14 मईगुरुवाररोहिणीद्वितीया
15 मईशुक्रवाररोहिणीद्वितीया
16 मईशनिवारमृगशिरातृतीया
21 मईगुरुवारमघाअष्टमी
23 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
24 मईरविवारहस्तएकादशी
28 मईगुरुवारअनुराधाप्रतिपदा
29 मईशुक्रवारमूलद्वितीया

जून

8 मुहूर्त
6 जूनशनिवाररेवतीदशमी
12 जूनशुक्रवारमृगशिराप्रतिपदा
17 जूनबुधवारमघाषष्ठी
19 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
22 जूनसोमवारस्वातीएकादशी
24 जूनबुधवारअनुराधात्रयोदशी
26 जूनशुक्रवारमूलपूर्णिमा
28 जूनरविवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

जुलाई

5 मुहूर्त
2 जुलाईगुरुवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
3 जुलाईशुक्रवाररेवतीअष्टमी
8 जुलाईबुधवाररोहिणीत्रयोदशी
17 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
18 जुलाईशनिवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

4 मुहूर्त
21 नवंबरशनिवाररोहिणीप्रतिपदा
22 नवंबररविवाररोहिणीद्वितीया
23 नवंबरसोमवारमृगशिरातृतीया
28 नवंबरशनिवारमघासप्तमी

दिसंबर

3 मुहूर्त
3 दिसंबरगुरुवारस्वातीद्वादशी
7 दिसंबरसोमवारमूलद्वितीया
14 दिसंबरसोमवाररेवतीदशमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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