शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2057

2057 की 45 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
17 जनवरीबुधवाररोहिणीद्वादशी
18 जनवरीगुरुवारमृगशिरात्रयोदशी
25 जनवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
26 जनवरीशुक्रवारहस्तषष्ठी
28 जनवरीरविवारस्वातीअष्टमी

फ़रवरी

10 मुहूर्त
1 फ़रवरीगुरुवारमूलद्वादशी
8 फ़रवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
9 फ़रवरीशुक्रवाररेवतीषष्ठी
14 फ़रवरीबुधवारमृगशिरादशमी
19 फ़रवरीसोमवारमघापूर्णिमा
21 फ़रवरीबुधवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
22 फ़रवरीगुरुवारहस्ततृतीया
24 फ़रवरीशनिवारस्वातीपंचमी
26 फ़रवरीसोमवारअनुराधाअष्टमी
28 फ़रवरीबुधवारमूलदशमी

मार्च

4 मुहूर्त
2 मार्चशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी
7 मार्चबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
8 मार्चगुरुवाररेवतीतृतीया
12 मार्चसोमवाररोहिणीसप्तमी

अप्रैल

3 मुहूर्त
15 अप्रैलरविवारमघाएकादशी
20 अप्रैलशुक्रवारस्वातीप्रतिपदा
22 अप्रैलरविवारअनुराधातृतीया

मई

6 मुहूर्त
6 मईरविवाररोहिणीतृतीया
16 मईबुधवारहस्तद्वादशी
19 मईशनिवारअनुराधाप्रतिपदा
21 मईसोमवारमूलतृतीया
23 मईबुधवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
28 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी

जून

6 मुहूर्त
3 जूनरविवारमृगशिराप्रतिपदा
9 जूनशनिवारमघासप्तमी
14 जूनगुरुवारस्वातीद्वादशी
17 जूनरविवारमूलपूर्णिमा
24 जूनरविवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी
29 जूनशुक्रवाररोहिणीत्रयोदशी

जुलाई

2 मुहूर्त
8 जुलाईरविवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
9 जुलाईसोमवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

6 मुहूर्त
8 नवंबरगुरुवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
9 नवंबरशुक्रवाररेवतीत्रयोदशी
14 नवंबरबुधवारमृगशिरातृतीया
22 नवंबरगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
23 नवंबरशुक्रवारहस्तद्वादशी
28 नवंबरबुधवारमूलद्वितीया

दिसंबर

3 मुहूर्त
5 दिसंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
6 दिसंबरगुरुवाररेवतीएकादशी
10 दिसंबरसोमवाररोहिणीपूर्णिमा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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