शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2056

2056 की 50 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
17 जनवरीसोमवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
22 जनवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
23 जनवरीरविवाररेवतीषष्ठी
28 जनवरीशुक्रवाररोहिणीएकादशी
29 जनवरीशनिवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
3 फ़रवरीगुरुवारमघाद्वितीया
6 फ़रवरीरविवारहस्तषष्ठी
7 फ़रवरीसोमवारस्वातीसप्तमी
11 फ़रवरीशुक्रवारमूलएकादशी
13 फ़रवरीरविवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
20 फ़रवरीरविवाररेवतीपंचमी
24 फ़रवरीगुरुवाररोहिणीअष्टमी

मार्च

5 मुहूर्त
3 मार्चशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
4 मार्चशनिवारहस्ततृतीया
6 मार्चसोमवारस्वातीपंचमी
8 मार्चबुधवारअनुराधासप्तमी
12 मार्चरविवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी

अप्रैल

1 मुहूर्त
30 अप्रैलरविवारस्वातीप्रतिपदा

मई

12 मुहूर्त
1 मईसोमवारअनुराधाद्वितीया
5 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
10 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
11 मईगुरुवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
12 मईशुक्रवाररेवतीत्रयोदशी
17 मईबुधवारमृगशिरातृतीया
22 मईसोमवारमघासप्तमी
24 मईबुधवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
25 मईगुरुवारहस्तएकादशी
27 मईशनिवारस्वातीत्रयोदशी
29 मईसोमवारअनुराधापूर्णिमा
31 मईबुधवारमूलतृतीया

जून

8 मुहूर्त
2 जूनशुक्रवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
7 जूनबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
8 जूनगुरुवाररेवतीएकादशी
19 जूनसोमवारमघाषष्ठी
21 जूनबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
23 जूनशुक्रवारस्वातीदशमी
25 जूनरविवारअनुराधात्रयोदशी
29 जूनगुरुवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया

जुलाई

3 मुहूर्त
5 जुलाईबुधवाररेवतीअष्टमी
10 जुलाईसोमवाररोहिणीत्रयोदशी
19 जुलाईबुधवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

5 मुहूर्त
18 नवंबरशनिवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
19 नवंबररविवाररेवतीत्रयोदशी
23 नवंबरगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
24 नवंबरशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
30 नवंबरगुरुवारमघाअष्टमी

दिसंबर

4 मुहूर्त
2 दिसंबरशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
3 दिसंबररविवारहस्तएकादशी
4 दिसंबरसोमवारस्वातीद्वादशी
8 दिसंबरशुक्रवारमूलद्वितीया

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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