शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2053

2053 की 46 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

7 मुहूर्त
15 जनवरीबुधवारअनुराधाएकादशी
17 जनवरीशुक्रवारमूलत्रयोदशी
20 जनवरीसोमवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
25 जनवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
26 जनवरीरविवाररेवतीषष्ठी
30 जनवरीगुरुवाररोहिणीएकादशी
31 जनवरीशुक्रवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

6 मुहूर्त
7 फ़रवरीशुक्रवारहस्तपंचमी
9 फ़रवरीरविवारस्वातीसप्तमी
14 फ़रवरीशुक्रवारमूलएकादशी
16 फ़रवरीरविवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
21 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
26 फ़रवरीबुधवाररोहिणीअष्टमी

मार्च

3 मुहूर्त
6 मार्चगुरुवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
7 मार्चशुक्रवारहस्ततृतीया
9 मार्चरविवारस्वातीपंचमी

अप्रैल

3 मुहूर्त
23 अप्रैलबुधवारमृगशिरापंचमी
27 अप्रैलरविवारमघादशमी
30 अप्रैलबुधवारहस्तत्रयोदशी

मई

9 मुहूर्त
2 मईशुक्रवारस्वातीपूर्णिमा
5 मईसोमवारअनुराधातृतीया
9 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
14 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
15 मईगुरुवाररेवतीद्वादशी
19 मईसोमवाररोहिणीप्रतिपदा
25 मईरविवारमघाअष्टमी
28 मईबुधवारहस्तएकादशी
30 मईशुक्रवारस्वातीत्रयोदशी

जून

1 मुहूर्त
1 जूनरविवारअनुराधापूर्णिमा

जुलाई

9 मुहूर्त
3 जुलाईगुरुवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया
9 जुलाईबुधवाररेवतीअष्टमी
13 जुलाईरविवाररोहिणीद्वादशी
14 जुलाईसोमवारमृगशिरात्रयोदशी
18 जुलाईशुक्रवारमघातृतीया
20 जुलाईरविवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
21 जुलाईसोमवारहस्तषष्ठी
23 जुलाईबुधवारस्वातीअष्टमी
25 जुलाईशुक्रवारअनुराधादशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

3 मुहूर्त
23 नवंबररविवाररेवतीद्वादशी
26 नवंबरबुधवाररोहिणीप्रतिपदा
27 नवंबरगुरुवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

5 मुहूर्त
4 दिसंबरगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
5 दिसंबरशुक्रवारहस्तएकादशी
7 दिसंबररविवारस्वातीत्रयोदशी
11 दिसंबरगुरुवारमूलप्रतिपदा
13 दिसंबरशनिवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

अन्य वर्ष