गुरु पूर्णिमा 2087
आषाढ़ की पूर्णिमा को गुरु वंदन — व्यास पूर्णिमा।
आज का पंचांग
काशी संदर्भ · तुरंत गणना- तिथि
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मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)05:16
- सूर्यास्त18:51
- व्रत अवधि (तिथि)01:06 → 2087-07-16 · 01:32
- पारण (तिथि समाप्ति)01:322087-07-16
Festival days follow the classical attribution rules — udaya (sunrise), pradosha (evening), nishita (midnight), madhyahna or aparahna vyapini as each festival prescribes — computed for Kashi/Varanasi (IST). Regional observance can differ by a day in some years.
गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंगुरु पूर्णिमा — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुरु पूर्णिमा कब मनाई जाती है?
आषाढ़ मास की पूर्णिमा को, वर्षा ऋतु के आरंभ में — शुक्ल पक्ष का पंद्रहवाँ दिन। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।
गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा क्यों कहते हैं?
यह वेद व्यास का जन्मदिन मनाया जाता है, जिन्होंने वेद को चार में विभाजित किया, महाभारत और पुराणों की रचना की, और परंपरा के आदर्श गुरु रूप में सम्मानित हैं। आज गुरु का सम्मान उस समस्त शिक्षण-परंपरा का सम्मान है जो उन तक पहुँचती है।
गुरु पूर्णिमा कैसे मनाई जाती है?
शिष्य अपने गुरु का सम्मान करते हैं — पुष्प, दक्षिणा और आदर अर्पित कर, चरण स्पर्श कर — अथवा जहाँ गुरु अनुपस्थित हों वहाँ गुरु पादुका या प्रतिमा की पूजा करते हैं। व्यास और परंपरा की पूजा होती है, और अध्ययन या साधना का संकल्प लिया जाता है।
गुरु शब्द का अर्थ क्या है?
पारंपरिक व्युत्पत्ति से 'गु' का अर्थ अंधकार और 'रु' उसका निवारण करने वाला — गुरु वह है जो अज्ञान का अंधकार दूर करता है। गुरु पूर्णिमा उन सबको स्वीकार करने का दिन है जिनसे सच्चा ज्ञान प्राप्त हुआ।
Other major festivals in 2087
- मकर संक्रांति — 15 जनवरी 2087
- वसंत पंचमी — 7 फ़रवरी 2087
- महाशिवरात्रि — 3 मार्च 2087
- होलिका दहन — 18 मार्च 2087
- होली — 20 मार्च 2087
- चैत्र नवरात्रि प्रारंभ — 4 अप्रैल 2087
- राम नवमी — 11 अप्रैल 2087
- अक्षय तृतीया — 5 मई 2087
- जगन्नाथ रथ यात्रा — 2 जुलाई 2087
- नाग पंचमी — 3 अगस्त 2087
- रक्षा बंधन — 14 अगस्त 2087
- कृष्ण जन्माष्टमी — 20 अगस्त 2087
- हरतालिका तीज — 31 अगस्त 2087
- गणेश चतुर्थी — 1 सितंबर 2087
- अनंत चतुर्दशी — 11 सितंबर 2087
- पितृ पक्ष प्रारंभ — 13 सितंबर 2087
- शारदीय नवरात्रि प्रारंभ — 27 सितंबर 2087
- दुर्गा अष्टमी — 5 अक्टूबर 2087
- महानवमी — 6 अक्टूबर 2087
- दशहरा / विजयादशमी — 7 अक्टूबर 2087
- धनतेरस — 23 अक्टूबर 2087
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) — 25 अक्टूबर 2087
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा) — 25 अक्टूबर 2087
- गोवर्धन पूजा — 27 अक्टूबर 2087
- भाई दूज — 28 अक्टूबर 2087
- छठ पूजा — 1 नवंबर 2087
- कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) — 10 नवंबर 2087
- गुरु नानक जयंती — 10 नवंबर 2087
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