Festival Calendar
करवा चौथ 2044
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी — चंद्रोदय तक सुहागिनों का निर्जल व्रत।
करवा चौथ 2044 date
सोमवार, 10 अक्टूबर 2044
Tithi: कार्तिक कृष्ण चतुर्थी
Tithi window: 01:21 AM, सोमवार, 10 अक्टूबर 2044 → 11:12 PM, सोमवार, 10 अक्टूबर 2044
करवा चौथ 2044
आरंभ में00दिन
:00घंटे
:00मिनट
:00सेकंड
आज का पंचांग
काशी संदर्भ · तुरंत गणना- तिथि
- अष्टमी
- तक 18:59
- नक्षत्र
- भरणी
- तक 20:18
- योग
- गण्ड
- करण
- बालव
- सूर्योदय
- 05:27
- सूर्यास्त
- 18:40
- चंद्र राशि
- मेष
- सूर्य राशि
- कर्क
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)05:53
- चंद्रोदय · काशी20:06शहर अनुसार समय शीघ्र
- व्रत अवधि (तिथि)01:21 → 23:12
- पारण (तिथि समाप्ति)23:12
Festival days follow the classical attribution rules — udaya (sunrise), pradosha (evening), nishita (midnight), madhyahna or aparahna vyapini as each festival prescribes — computed for Kashi/Varanasi (IST). Regional observance can differ by a day in some years.
करवा चौथ की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंकरवा चौथ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
करवा चौथ का व्रत ठीक कब खुलता है?
केवल चंद्रमा के वास्तविक दर्शन के पश्चात — किसी नियत घड़ी पर नहीं। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी का चंद्रोदय नगर के अनुसार भिन्न होता है और प्रायः संध्या में पड़ता है।
चंद्रमा को छलनी से क्यों देखा जाता है?
छलनी से चंद्रमा देखा जाता है और तत्क्षण उसी छलनी से, उसी प्रकाश में, पति को। परंपरा यह भी मानती है कि इससे चतुर्थी के चंद्र की सीधी दृष्टि कोमल हो जाती है।
क्या व्रत जल के साथ रखा जा सकता है?
परंपरागत रूप निर्जला है। गर्भवती, अस्वस्थ अथवा वृद्ध स्त्रियाँ फल और जल सहित फलाहार व्रत रखती हैं, जो मान्य है।
Other major festivals in 2044
- मकर संक्रांति — 15 जनवरी 2044
- वसंत पंचमी — 4 फ़रवरी 2044
- महाशिवरात्रि — 27 फ़रवरी 2044
- होलिका दहन — 13 मार्च 2044
- होली — 14 मार्च 2044
- चैत्र नवरात्रि प्रारंभ — 30 मार्च 2044
- राम नवमी — 6 अप्रैल 2044
- अक्षय तृतीया — 30 अप्रैल 2044
- जगन्नाथ रथ यात्रा — 27 जून 2044
- गुरु पूर्णिमा — 10 जुलाई 2044
- नाग पंचमी — 29 जुलाई 2044
- रक्षा बंधन — 8 अगस्त 2044
- कृष्ण जन्माष्टमी — 16 अगस्त 2044
- हरतालिका तीज — 25 अगस्त 2044
- गणेश चतुर्थी — 26 अगस्त 2044
- अनंत चतुर्दशी — 6 सितंबर 2044
- पितृ पक्ष प्रारंभ — 8 सितंबर 2044
- शारदीय नवरात्रि प्रारंभ — 22 सितंबर 2044
- दुर्गा अष्टमी — 29 सितंबर 2044
- महानवमी — 30 सितंबर 2044
- दशहरा / विजयादशमी — 1 अक्टूबर 2044
- धनतेरस — 18 अक्टूबर 2044
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) — 19 अक्टूबर 2044
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा) — 20 अक्टूबर 2044
- गोवर्धन पूजा — 21 अक्टूबर 2044
- भाई दूज — 22 अक्टूबर 2044
- छठ पूजा — 27 अक्टूबर 2044
- कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) — 5 नवंबर 2044
- गुरु नानक जयंती — 5 नवंबर 2044
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