करवा चौथ 2026
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी — चंद्रोदय तक सुहागिनों का निर्जल व्रत।
आज का पंचांग
काशी संदर्भ · तुरंत गणना- तिथि
- नवमी
- तक 17:50
- नक्षत्र
- पूर्व आषाढ़ा
- तक 04:31
- योग
- सौभाग्य
- करण
- कौलव
- सूर्योदय
- 05:45
- सूर्यास्त
- 17:57
- चंद्र राशि
- धनु
- सूर्य राशि
- कन्या
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)06:03
- चंद्रोदय · काशी19:49शहर अनुसार समय शीघ्र
- व्रत अवधि (तिथि)01:14 → 22:15
- पारण (तिथि समाप्ति)22:15
करवा चौथ 2026 में क्या विशेष है
काशी / IST संदर्भ2026 में करवा चौथ गुरुवार को पड़ रही है।
यह पर्व कैलेंडर की तारीख़ से नहीं, चंद्र तिथि से तय होता है — इसलिए हर वर्ष ग्रेगोरियन तिथि बदलती है:
- करवा चौथ 2025 — 10 अक्टूबर · कैलेंडर में 19 दिन बाद
- करवा चौथ 2027 — 18 अक्टूबर · कैलेंडर में 11 दिन बाद
इस अवसर के लिए गणना किए गए समय
- संकल्प (सूर्योदय)06:03
- चंद्रोदय · काशी19:49
- तिथि अवधि01:14 → 22:15
2026 में उस दिन का पंचांग
- नक्षत्ररोहिणी
- योगपरिघ
- करणबव
- चंद्र राशिवृषभ
- सूर्योदय / सूर्यास्त06:03 – 17:19
- राहु काल (वर्जित)13:06 – 14:30
करवा चौथ 2026 के आसपास
2026 में इसके एक सप्ताह के भीतर पड़ने वाले पर्व — यह क्रम इसी वर्ष का है:
- शरद पूर्णिमा — 26 अक्टूबर · 3 दिन पहले
- अहोई अष्टमी — 2 नवंबर · 4 दिन बाद
पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
करवा चौथ क्यों मनाई जाती है
करवा चौथ कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पड़ता है। विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु हेतु सूर्योदय से पूर्व से चंद्र-दर्शन तक निर्जला व्रत रखती हैं — बिना अन्न और जल के। यह प्रचलित व्रतों में कठोरतम में है, और समय की दृष्टि से सर्वाधिक सूक्ष्म: इसका अंत किसी घड़ी की बेला पर नहीं, चंद्रोदय पर होता है, जो नगर के अनुसार और प्रति वर्ष कुछ मिनट बदलता है।
व्रत का आरंभ सरगी से होता है, वह भोजन जो प्रातःकाल से पूर्व लिया जाता है, परंपरा से सास द्वारा भेजा हुआ। समापन तब होता है जब स्त्री छलनी से चंद्रमा को देखती है, फिर उसी छलनी से पति को देखती है, और उनके हाथ से जल ग्रहण करती है।
छलनी वही विवरण है जो अर्थ धारण करती है। चंद्रमा को केवल किसी छानने वाली वस्तु से देखा जाता है — और तत्क्षण उसी प्रकार, उसी प्रकाश में, पति को भी।
करवा चौथ पूजा विधि — संक्षेप में
- सूर्योदय से पूर्व सरगी ग्रहण करें, तत्पश्चात निर्जला व्रत का संकल्प लें।
- दिन भर निर्जल व्रत रखें। अनेक स्त्रियाँ अपराह्न कथा-मंडली में बिताती हैं।
- संध्या को पूजन सजाएँ: गौरी-गणेश की प्रतिमा, प्रज्वलित दीप, और ढक्कन सहित जल भरा करवा।
- चंद्रोदय से पूर्व करवा चौथ की कथा सुनें अथवा पढ़ें, और कथा के साथ थाली को मंडली में घुमाएँ।
- चंद्रोदय होने पर छलनी से चंद्रमा को देखें। करवा से जल गिराकर अर्घ्य दें।
- फिर मुड़कर उसी छलनी से पति को देखें।
- उनके हाथ से जल और प्रथम ग्रास ग्रहण करें। तत्पश्चात बड़ों के चरण स्पर्श कर भोजन करें।
आवश्यक पूजा सामग्री
- करवा (टोंटीदार मिट्टी या पीतल का पात्र)
- छलनी
- अर्घ्य हेतु दीया और जल
- सिंदूर और सोलह शृंगार
- मेहँदी और चूड़ियाँ
- करवा चौथ की थाली — रोली, अक्षत, मिष्ठान्न
- व्रत कथा की पुस्तक
- चुनरी
- सास से मिली सरगी और बाया
करवा चौथ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
करवा चौथ का व्रत ठीक कब खुलता है?
केवल चंद्रमा के वास्तविक दर्शन के पश्चात — किसी नियत घड़ी पर नहीं। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी का चंद्रोदय नगर के अनुसार भिन्न होता है और प्रायः संध्या में पड़ता है।
चंद्रमा को छलनी से क्यों देखा जाता है?
छलनी से चंद्रमा देखा जाता है और तत्क्षण उसी छलनी से, उसी प्रकाश में, पति को। परंपरा यह भी मानती है कि इससे चतुर्थी के चंद्र की सीधी दृष्टि कोमल हो जाती है।
क्या व्रत जल के साथ रखा जा सकता है?
परंपरागत रूप निर्जला है। गर्भवती, अस्वस्थ अथवा वृद्ध स्त्रियाँ फल और जल सहित फलाहार व्रत रखती हैं, जो मान्य है।
2026 के अन्य प्रमुख पर्व
- मकर संक्रांति — 14 जनवरी 2026
- वसंत पंचमी — 23 जनवरी 2026
- महाशिवरात्रि — 15 फ़रवरी 2026
- होलिका दहन — 3 मार्च 2026
- होली — 4 मार्च 2026
- चैत्र नवरात्रि प्रारंभ — 19 मार्च 2026
- राम नवमी — 26 मार्च 2026
- अक्षय तृतीया — 19 अप्रैल 2026
- जगन्नाथ रथ यात्रा — 16 जुलाई 2026
- गुरु पूर्णिमा — 29 जुलाई 2026
- नाग पंचमी — 17 अगस्त 2026
- रक्षा बंधन — 28 अगस्त 2026
- कृष्ण जन्माष्टमी — 4 सितंबर 2026
- हरतालिका तीज — 14 सितंबर 2026
- गणेश चतुर्थी — 14 सितंबर 2026
- अनंत चतुर्दशी — 25 सितंबर 2026
- पितृ पक्ष प्रारंभ — 27 सितंबर 2026
- शारदीय नवरात्रि प्रारंभ — 11 अक्टूबर 2026
- दुर्गा अष्टमी — 19 अक्टूबर 2026
- महानवमी — 20 अक्टूबर 2026
- दशहरा / विजयादशमी — 20 अक्टूबर 2026
- धनतेरस — 6 नवंबर 2026
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) — 8 नवंबर 2026
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा) — 8 नवंबर 2026
- गोवर्धन पूजा — 10 नवंबर 2026
- भाई दूज — 11 नवंबर 2026
- छठ पूजा — 15 नवंबर 2026
- कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) — 24 नवंबर 2026
- गुरु नानक जयंती — 24 नवंबर 2026
- हिंदू पर्व-त्योहार 2026 →