पर्व कैलेंडर

दीपावली (लक्ष्मी पूजा) 2026

प्रकाश पर्व — प्रदोष काल में अमावस्या व्याप्त रहते लक्ष्मी पूजन।

दीपावली (लक्ष्मी पूजा) 2026 तिथि
रविवार, 8 नवंबर 2026
तिथि: कार्तिक अमावस्या
तिथि अवधि: 11:30 AM, रविवार, 8 नवंबर 2026 → 12:31 PM, सोमवार, 9 नवंबर 2026
दीपावली (लक्ष्मी पूजा) 2026
आरंभ में
शीघ्र आरंभ

आज का पंचांग

काशी संदर्भ · तुरंत गणना
तिथि
नवमी
तक 17:50
नक्षत्र
पूर्व आषाढ़ा
तक 04:31
योग
सौभाग्य
करण
कौलव
सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
17:57
चंद्र राशि
धनु
सूर्य राशि
कन्या

मुहूर्त और समय

काशी/IST · खगोलीय गणना
  • संकल्प (सूर्योदय)06:10
  • प्रदोष पूजा मुहूर्त17:13 – 19:37
  • व्रत अवधि (तिथि)11:30 → 2026-11-09 · 12:31
  • पारण (तिथि समाप्ति)12:312026-11-09

दीपावली (लक्ष्मी पूजा) 2026 में क्या विशेष है

काशी / IST संदर्भ

2026 में दीपावली (लक्ष्मी पूजा) रविवार को पड़ रही है।

यह पर्व कैलेंडर की तारीख़ से नहीं, चंद्र तिथि से तय होता है — इसलिए हर वर्ष ग्रेगोरियन तिथि बदलती है:

इस अवसर के लिए गणना किए गए समय

  • संकल्प (सूर्योदय)06:10
  • प्रदोष पूजा मुहूर्त17:13 – 19:37
  • तिथि अवधि11:30 → 2026-11-09 · 12:31

2026 में उस दिन का पंचांग

  • नक्षत्रस्वाती
  • योगआयुष्मान
  • करणशकुनि
  • चंद्र राशितुला
  • सूर्योदय / सूर्यास्त06:10 – 17:13
  • राहु काल (वर्जित)15:50 – 17:13

दीपावली (लक्ष्मी पूजा) 2026 के आसपास

2026 में इसके एक सप्ताह के भीतर पड़ने वाले पर्व — यह क्रम इसी वर्ष का है:

उस दिन का पूरा पंचांग देखें

पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।

दीपावली (लक्ष्मी पूजा) क्यों मनाई जाती है

दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है — चंद्र वर्ष की सबसे अंधेरी रात। यही चुनाव पर्व का पूरा अर्थ है: दीपक का महत्व इसलिए है क्योंकि रात निष्चंद्र है। समृद्धि और कल्याण की देवी लक्ष्मी को उस घर में आमंत्रित किया जाता है जिसे स्वच्छ, व्यवस्थित और आलोकित किया गया हो।

भिन्न क्षेत्रों में इस पर्व की भिन्न स्मृतियाँ हैं, और सभी को समान रूप से सत्य माना जाता है। उत्तर भारत चौदह वर्ष के वनवास के बाद श्रीराम के अयोध्या-आगमन का स्मरण करता है, जब नगर ने दीप-पंक्तियाँ सजाकर उनका मार्ग आलोकित किया। दक्षिण भारत में श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर-वध का स्मरण होता है। जैन परंपरा में यह भगवान महावीर का निर्वाण-दिवस है, और सिख परंपरा में बंदी छोड़ दिवस, जब गुरु हरगोबिंद जी बावन राजाओं सहित ग्वालियर दुर्ग से मुक्त हुए।

लक्ष्मी पूजन संध्या को प्रदोष काल में किया जाता है — वह अवधि जो सूर्यास्त से आरंभ होती है — और स्थिर लग्न को श्रेष्ठ माना जाता है, ताकि आमंत्रित लक्ष्मी स्थिर रहें।

दीपावली (लक्ष्मी पूजा) पूजा विधि — संक्षेप में

  1. घर की पूर्ण सफाई करें और द्वार पर रंगोली बनाएँ; पूजन के समय मुख्य द्वार खुला रखें।
  2. सूर्यास्त से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजन प्रदोष काल में आरंभ करें।
  3. चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएँ। गणेश और लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें — गणेश जी लक्ष्मी जी के दाहिनी ओर।
  4. समीप आम्रपत्र और नारियल सहित जल-कलश रखें। चौकी पर सिक्के, बही-खाते अथवा व्यापार-पुस्तिका रखें।
  5. घी का दीप जलाएँ; हल्दी, कुमकुम, अक्षत, पुष्प, पान और मिष्ठान्न अर्पित करें। गणेश जी को दूर्वा और लक्ष्मी जी को कमल अर्पित करें।
  6. प्रथम गणेश जी का आवाहन करें — प्रत्येक कर्म उन्हीं से आरंभ होता है — तत्पश्चात लक्ष्मी जी का। लक्ष्मी मंत्र का जप कर आरती करें।
  7. प्रसाद वितरित करें, फिर सम्पूर्ण घर और द्वार पर दीप प्रज्वलित करें।

आवश्यक पूजा सामग्री

  • मिट्टी के दीये और बाती सहित तेल / घी
  • लक्ष्मी–गणेश की मूर्ति या चित्र
  • कलश और सिक्के / चाँदी
  • कुमकुम, रोली, अक्षत, चंदन
  • कमल या गेंदे के पुष्प
  • खील, बताशे और मिष्ठान्न
  • गंगाजल और शंख
  • कर्पूर और धूप
  • कौड़ी और नई बही-खाता (व्यापारियों हेतु)
दीपावली (लक्ष्मी पूजा) की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ें

दीपावली (लक्ष्मी पूजा) — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का सही समय क्या है?

लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में किया जाता है, जो सूर्यास्त से आरंभ होता है, और वृषभ जैसे स्थिर लग्न में श्रेष्ठ माना जाता है। सटीक समय नगर के अनुसार बदलता है, क्योंकि वह स्थानीय सूर्यास्त पर निर्भर है।

दीपावली अमावस्या की रात्रि को क्यों मनाई जाती है?

कार्तिक अमावस्या चंद्र वर्ष की सर्वाधिक अंधकारमय रात्रि है। उसी पर दीप जलाना ही मर्म है: यह पर्व वहाँ प्रकाश उत्पन्न करने का है जहाँ प्रकाश दिया नहीं गया।

गणेश जी को लक्ष्मी जी के दाएँ रखें या बाएँ?

प्रतिमाओं के सम्मुख खड़े होकर देखने पर गणेश जी लक्ष्मी जी के दाहिनी ओर स्थापित किए जाते हैं। आवाहन सर्वप्रथम उन्हीं का होता है, क्योंकि प्रत्येक कर्म उन्हीं से आरंभ होता है।

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