गुरु नानक जयंती 2026
कार्तिक पूर्णिमा को गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व।
आज का पंचांग
काशी संदर्भ · तुरंत गणना- तिथि
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मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)06:21
- सूर्यास्त17:08
- व्रत अवधि (तिथि)2026-11-23 · 23:49 → 20:32
- पारण (तिथि समाप्ति)20:32
गुरु नानक जयंती का महत्व
गुरु नानक जयंती, अथवा गुरपुरब, गुरु नानक देव जी के प्रकाश का पर्व है, जो दस सिख गुरुओं में प्रथम और सिखी के संस्थापक थे। यह कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है और प्रकाश उत्सव कहलाता है — गुरु के प्रकाश, अर्थात् संसार में आगमन, का उत्सव।
गुरु नानक ने ईश्वर की एकता का उपदेश दिया — इक ओंकार, वह एक जिसका नाम सत्य है — और जाति, कर्मकांड तथा धर्म के खोखले रूपों के भेदों को अस्वीकार किया, इसके स्थान पर ईमानदार श्रम (किरत करनी), दूसरों से बाँटना (वंड छकना) और नाम-स्मरण (नाम जपना) का आह्वान किया। उनका संदेश हिंदू और मुसलमान दोनों परंपराओं की सीमाओं को पार कर गया।
यह दिन मूर्ति-पूजा से नहीं, अपितु गुरु ग्रंथ साहिब के पाठ, सामूहिक शबद-कीर्तन, नगर कीर्तन और लंगर के साझा भोजन से मनाया जाता है — आचरण स्वयं उस समानता और सेवा को साकार करता है जो गुरु ने सिखाई।
गुरु नानक जयंती का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
गुरु नानक का जन्म 1469 में राय भोई दी तलवंडी में हुआ, अब पाकिस्तान का ननकाना साहिब। सुल्तानपुर लोधी में बेईं नदी पर एक गहन अनुभव के पश्चात, वे लंबी यात्राओं — उदासियों — पर निकले जो उन्हें भारत भर और, परंपरानुसार, मक्का, बगदाद और तिब्बत तक ले गईं, एक निराकार ईश्वर और सबकी समता सिखाते हुए। अंततः वे करतारपुर में बसे, जहाँ उन्होंने ईमानदार श्रम, साझा भोजन और नाम-स्मरण के इर्द-गिर्द एक समुदाय की नींव रखी। उनके जन्म का गुरपुरब सिख वर्ष का सर्वाधिक महत्वपूर्ण उत्सव बना।
शास्त्रीय संदर्भ
दिन गुरु ग्रंथ साहिब पर केंद्रित है, सिखों के शाश्वत गुरु, जिसके सम्मुख संगत निरंतर 48-घंटे पाठ (अखंड पाठ) हेतु एकत्र होती है। गुरु नानक का अपना जपुजी साहिब ग्रंथ खोलता है, मूल मंत्र — 'ੴ इक ओंकार', एक है — से आरंभ, और उनकी वाणी इसमें बहती है। शिक्षा जी जाती है, केवल पढ़ी नहीं: नाम जपो, किरत करो, वंड छको।
गुरु नानक जयंती पूजा विधि
- 1पूर्व के दिनों में अखंड पाठ आरंभ किया जाता है ताकि वह गुरपुरब के प्रातः समाप्त हो।
- 2पूर्व संध्या पर नगर कीर्तन की शोभायात्रा नगर में निकाली जाती है, जिसका नेतृत्व पंज प्यारे और सजी पालकी पर गुरु ग्रंथ साहिब करते हैं।
- 3उस दिन संगत अमृत वेला में आसा दी वार के गायन हेतु एकत्र होती है।
- 4शबद कीर्तन और कथा — शबद और उनकी व्याख्या — प्रातः भर चलते हैं।
- 5अरदास, सामूहिक प्रार्थना, की जाती है, और कड़ाह प्रसाद सबको बाँटा जाता है।
- 6लंगर सब उपस्थित जनों को परोसा जाता है, जो समान रूप में साथ बैठते हैं, गुरु के उपदेश को साकार करते हुए।
- 7सेवा और गुरबाणी का गायन दिन भर, प्रायः संध्या तक चलता है।
मंत्र
ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ ਕਰਤਾ ਪੁਰਖੁ ਨਿਰਭਉ ਨਿਰਵੈਰੁ ਅਕਾਲ ਮੂਰਤਿ ਅਜੂਨੀ ਸੈਭੰ ਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ॥
Ik Onkar, Sat Naam, Karta Purakh, Nirbhau, Nirvair, Akaal Moorat, Ajooni, Saibhang, Gur Prasad
गुरु ग्रंथ साहिब का आरंभ करने वाला मूल मंत्र: एक कर्ता, जिसका नाम सत्य है, कर्ता पुरुष, निर्भय, निर्वैर, कालातीत स्वरूप, अजन्मा, स्वयंभू, गुरु की कृपा से जाना जाने वाला।
व्रत के नियम
- सिख परंपरा इस दिन को उपवास पर केंद्रित नहीं करती; यह प्रार्थना, कीर्तन और सेवा (निःस्वार्थ सेवा) से मनाया जाता है।
- अखंड पाठ — गुरु ग्रंथ साहिब का आद्यंत अखंड पाठ — पूर्व के दो दिनों में पूर्ण किया जाता है, जो गुरपुरब के प्रातः समाप्त होता है।
- संगत प्रातःकाल (अमृत वेला) में आसा दी वार और शबद कीर्तन हेतु एकत्र होती है।
- लंगर, निःशुल्क सामुदायिक रसोई, सबको बिना पंथ या पद के भेद के परोसा जाता है।
- कार सेवा — गुरुद्वारे और समुदाय में स्वैच्छिक सेवा — दिन भर की जाती है।
सामान्य भूलें — किनसे बचें
- इसे केवल 'जयंती' कहना — सिख इसे गुरपुरब या प्रकाश उत्सव जानते हैं, गुरु के प्रकाश का पर्व।
- गुरुद्वारे में सिर ढके या जूते उतारे बिना प्रवेश, अथवा मद्य-तम्बाकू के पश्चात जाना।
- लंगर को हल्के में लेना — यह पवित्र है, साथ बैठकर समान रूप में खाया जाता; भोजन व्यर्थ नहीं किया जाता।
- दिन को केवल अनुष्ठान तक सीमित करना, उसकी ईमानदार श्रम, साझा और स्मरण की शिक्षा चूकना।
गुरु नानक जयंती की व्रत कथा
गुरु नानक का जन्म 1469 में राय भोई दी तलवंडी में हुआ, जो अब पाकिस्तान में ननकाना साहिब है। बाल्यकाल से ही उनका मन दिव्यता की ओर और खोखले कर्मकांड से विमुख था: जनेऊ पहनने को कहे जाने पर बालक नानक ने पूछा कि एक धागा आत्मा के लिए क्या कर सकता है, और इसके स्थान पर करुणा और संतोष का ऐसा धागा माँगा जो न टूटे न जले।
सुल्तानपुर में युवावस्था में वे एक प्रातः नदी में स्नान को गए और तीन दिन तक न लौटे। जब वे प्रकट हुए, तो उनके प्रथम शब्द थे 'न कोई हिंदू, न कोई मुसलमान' — अर्थात् ईश्वर के समक्ष वे भेद, जिनसे मनुष्य स्वयं को बाँटते हैं, मिट जाते हैं। तत्पश्चात वे भारत और उसके परे लंबी यात्राओं पर निकले, एक नाम का उपदेश पद्य और साझा भोजन में देते हुए, और समय पर उस समुदाय और आचरण की स्थापना की जिससे सिख पंथ विकसित हुआ।
गुरु नानक जयंती — समय-रेखा
- दो दिन पूर्व — अखंड पाठ
संपूर्ण गुरु ग्रंथ साहिब का निरंतर 48-घंटे पाठ आरंभ होता है, गुरपुरब प्रातः समाप्त।
- पूर्व-संध्या — प्रभात फेरी एवं नगर कीर्तन
पूर्व के दिनों प्रातःकालीन कीर्तन-यात्राएँ, और पंज प्यारे तथा गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी के नेतृत्व में भव्य नगर कीर्तन।
- गुरपुरब दिवस
भोर से कीर्तन, कथा और गुरु नानक की वाणी का गान; लंगर सबको बिना भेद परोसा जाता है।
- संध्या — दीपमाला
गुरुद्वारे दीपों से जगमगाते हैं, और कुछ स्थानों पर आतिशबाजी और दीपक उनके जन्म की रात्रि चिह्नित करते हैं।
प्रसिद्ध स्थान एवं मंदिर
ननकाना साहिब, पाकिस्तान
गुरु नानक की जन्मभूमि; गुरुद्वारा जन्म अस्थान गुरपुरब पर भारत और प्रवासी समुदाय से श्रद्धालु खींचता है।
स्वर्ण मंदिर, अमृतसर
श्री हरमंदिर साहिब सहस्रों दीप-मोमबत्तियों से प्रकाशित होता है, और सबसे बड़ा गुरपुरब उत्सव यहीं होता है।
गुरुद्वारा दरबार साहिब, करतारपुर
जहाँ गुरु नानक ने अंतिम वर्ष बिताए; अब करतारपुर गलियारे से भारत से पहुँचा जा सकता है।
सुल्तानपुर लोधी (बेर साहिब)
जहाँ नानक को बेईं नदी पर ज्ञान प्राप्त हुआ; उनके आरंभिक जीवन का केंद्र।
रोचक तथ्य
- ◆इसे प्रकाश उत्सव — 'प्रकाश का पर्व' — कहते हैं, 1469 में गुरु नानक के प्रकाश के संसार में आने का चिह्न।
- ◆यह कार्तिक पूर्णिमा को पड़ता है, अतः उत्सव और दीप कार्तिक की सबसे उज्ज्वल रात्रि के नीचे रहते हैं।
- ◆गुरु नानक के तीन स्तंभ — नाम जपो, किरत करो, वंड छको — सिख जीवन का हृदय हैं।
- ◆उनके द्वारा आरंभ लंगर हर आगंतुक को धर्म, जाति या स्थिति से परे नि:शुल्क परोसा जाता है, अपने युग की एक क्रांतिकारी समता।
सामान्य प्रश्न
गुरु नानक जयंती कब मनाई जाती है?
कार्तिक पूर्णिमा को, कार्तिक की पूर्णिमा, शरद ऋतु में। यह गुरपुरब अथवा प्रकाश उत्सव कहलाती है, गुरु नानक के संसार में आगमन का उत्सव। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।
गुरु नानक जयंती कैसे मनाई जाती है?
अखंड पाठ (गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ) से, जो उस दिन प्रातः पूर्ण होता है, अमृत वेला में प्रातःकालीन कीर्तन, पूर्व संध्या पर नगर कीर्तन शोभायात्रा, अरदास, और सबको समान रूप में परोसा जाने वाला लंगर। यह मूर्ति-पूजा या उपवास से नहीं मनाई जाती।
नगर कीर्तन क्या है?
नगर की गलियों में निकाली जाने वाली शोभायात्रा, जिसका नेतृत्व पंज प्यारे और सजी पालकी पर गुरु ग्रंथ साहिब करते हैं, और संगत शबद गाती है। यह गुरपुरब उत्सव का केंद्रीय अंग है।
गुरु नानक ने क्या उपदेश दिया?
ईश्वर की एकता (इक ओंकार) और ईमानदार श्रम (किरत करनी), दूसरों से बाँटने (वंड छकना) तथा नाम-स्मरण (नाम जपना) पर आधारित जीवन, जाति-भेद और खोखले कर्मकांड को अस्वीकार करते हुए।
Festival days follow the classical attribution rules — udaya (sunrise), pradosha (evening), nishita (midnight), madhyahna or aparahna vyapini as each festival prescribes — computed for Kashi/Varanasi (IST). Regional observance can differ by a day in some years.
Other major festivals in 2026
- मकर संक्रांति — 14 जनवरी 2026
- वसंत पंचमी — 23 जनवरी 2026
- महाशिवरात्रि — 15 फ़रवरी 2026
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- भाई दूज — 11 नवंबर 2026
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