राधा अष्टमी 2087
जन्माष्टमी के पखवाड़े बाद राधा रानी का प्राकट्योत्सव।
आज का पंचांग
काशी संदर्भ · तुरंत गणना- तिथि
- अष्टमी
- तक 18:59
- नक्षत्र
- भरणी
- तक 20:18
- योग
- गण्ड
- करण
- बालव
- सूर्योदय
- 05:27
- सूर्यास्त
- 18:40
- चंद्र राशि
- मेष
- सूर्य राशि
- कर्क
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)05:39
- सूर्यास्त18:15
- व्रत अवधि (तिथि)2087-09-04 · 22:11 → 2087-09-06 · 00:28
- पारण (तिथि समाप्ति)00:282087-09-06
Festival days follow the classical attribution rules — udaya (sunrise), pradosha (evening), nishita (midnight), madhyahna or aparahna vyapini as each festival prescribes — computed for Kashi/Varanasi (IST). Regional observance can differ by a day in some years.
राधा अष्टमी की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंराधा अष्टमी — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राधा अष्टमी कब है?
भाद्रपद की शुक्ल अष्टमी को, कृष्ण जन्माष्टमी के पंद्रह दिन पश्चात। राधा का जन्म मध्याह्न में सम्मानित होता है। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।
राधा अष्टमी जन्माष्टमी से कैसे भिन्न है?
जन्माष्टमी कृष्ण का जन्म है, मध्यरात्रि में; राधा अष्टमी राधा का जन्म है, मध्याह्न में, पंद्रह दिन बाद। दोनों मिलकर एक दिव्य प्रेम के दो व्यक्तियों को घेरते हैं, सदा राधा-कृष्ण रूप में नामित।
राधा की पूजा कृष्ण से पहले क्यों होती है?
ब्रज और गौड़ीय परंपराओं में राधा कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति हैं — उनके अपने प्रेम और आनंद की शक्ति — और उन तक पहुँचने का सुनिश्चित मार्ग। अतः उनका नाम पहले लिया जाता है: राधा-कृष्ण, कभी विपरीत नहीं।
राधा अष्टमी सर्वाधिक भव्य कहाँ मनाई जाती है?
बरसाना में, ब्रज में राधा के गाँव में, राधा रानी मंदिर में, और वृंदावन तथा मथुरा भर में, दिनों की पूजा, कीर्तन और झूलन सहित; यह गौड़ीय और इस्कॉन भक्तों हेतु भी प्रमुख पर्व है।
Other major festivals in 2087
- मकर संक्रांति — 15 जनवरी 2087
- वसंत पंचमी — 7 फ़रवरी 2087
- महाशिवरात्रि — 3 मार्च 2087
- होलिका दहन — 18 मार्च 2087
- होली — 20 मार्च 2087
- चैत्र नवरात्रि प्रारंभ — 4 अप्रैल 2087
- राम नवमी — 11 अप्रैल 2087
- अक्षय तृतीया — 5 मई 2087
- जगन्नाथ रथ यात्रा — 2 जुलाई 2087
- गुरु पूर्णिमा — 15 जुलाई 2087
- नाग पंचमी — 3 अगस्त 2087
- रक्षा बंधन — 14 अगस्त 2087
- कृष्ण जन्माष्टमी — 20 अगस्त 2087
- हरतालिका तीज — 31 अगस्त 2087
- गणेश चतुर्थी — 1 सितंबर 2087
- अनंत चतुर्दशी — 11 सितंबर 2087
- पितृ पक्ष प्रारंभ — 13 सितंबर 2087
- शारदीय नवरात्रि प्रारंभ — 27 सितंबर 2087
- दुर्गा अष्टमी — 5 अक्टूबर 2087
- महानवमी — 6 अक्टूबर 2087
- दशहरा / विजयादशमी — 7 अक्टूबर 2087
- धनतेरस — 23 अक्टूबर 2087
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) — 25 अक्टूबर 2087
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा) — 25 अक्टूबर 2087
- गोवर्धन पूजा — 27 अक्टूबर 2087
- भाई दूज — 28 अक्टूबर 2087
- छठ पूजा — 1 नवंबर 2087
- कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) — 10 नवंबर 2087
- गुरु नानक जयंती — 10 नवंबर 2087
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