शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1964

1964 की 48 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
15 जनवरीबुधवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
20 जनवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
25 जनवरीशनिवाररोहिणीएकादशी
26 जनवरीरविवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
2 फ़रवरीरविवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
3 फ़रवरीसोमवारहस्तषष्ठी
5 फ़रवरीबुधवारस्वातीअष्टमी
9 फ़रवरीरविवारमूलएकादशी
16 फ़रवरीरविवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
22 फ़रवरीशनिवारमृगशिरादशमी
27 फ़रवरीगुरुवारमघापूर्णिमा

मार्च

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अप्रैल

5 मुहूर्त
16 अप्रैलगुरुवाररोहिणीपंचमी
17 अप्रैलशुक्रवारमृगशिराषष्ठी
24 अप्रैलशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीत्रयोदशी
27 अप्रैलसोमवारस्वातीप्रतिपदा
29 अप्रैलबुधवारअनुराधातृतीया

मई

12 मुहूर्त
3 मईरविवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
4 मईसोमवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
9 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
10 मईरविवाररेवतीत्रयोदशी
13 मईबुधवाररोहिणीद्वितीया
14 मईगुरुवारमृगशिरातृतीया
21 मईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
22 मईशुक्रवारहस्तएकादशी
24 मईरविवारस्वातीत्रयोदशी
28 मईगुरुवारमूलद्वितीया
29 मईशुक्रवारमूलतृतीया
31 मईरविवारउत्तर आषाढ़ापंचमी

जून

8 मुहूर्त
5 जूनशुक्रवारउत्तर भाद्रपदादशमी
6 जूनशनिवाररेवतीएकादशी
15 जूनसोमवारमघाषष्ठी
17 जूनबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
20 जूनशनिवारस्वातीएकादशी
22 जूनसोमवारअनुराधात्रयोदशी
25 जूनगुरुवारमूलपूर्णिमा
27 जूनशनिवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया

जुलाई

5 मुहूर्त
2 जुलाईगुरुवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
3 जुलाईशुक्रवाररेवतीअष्टमी
12 जुलाईरविवारमघातृतीया
15 जुलाईबुधवारहस्तसप्तमी
17 जुलाईशुक्रवारस्वातीअष्टमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

4 मुहूर्त
21 नवंबरशनिवारमृगशिराद्वितीया
26 नवंबरगुरुवारमघाअष्टमी
28 नवंबरशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
29 नवंबररविवारहस्तएकादशी

दिसंबर

3 मुहूर्त
5 दिसंबरशनिवारमूलप्रतिपदा
6 दिसंबररविवारमूलद्वितीया
14 दिसंबरसोमवाररेवतीदशमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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